दिल्ली दंगा: दिलबर नेगी के हत्यारोपियों को मसीहा बताकर बचानें में जुटा NDTV

नई दिल्ली, 1 जुलाई: बीते फ़रवरी महीनें में नागरिकता संसोधन कानून ( CAA ) के विरोध में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे हुए थे। इस दंगें में 20 वर्षीय युवक दिलबर नेगी कि बेरहमी से ह्त्या कर दी गई थी, दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट में बड़ा खुलासा हुआ है। इसमें मुस्तफाबाद में हुए दंगों का मास्टरमाइंड डॉक्टर एमए अनवर को भी बताया गया है। अनवर को बचानें के लिए एनडीटीवी ने मोर्चा संभाल लिया है।

पीड़ितों के इलाज का दावा करने वाला डॉक्टर अनवर, न्यू मुस्तफाबाद स्थित अल हिंद हॉस्पिटल का मालिक है। अल हिंद हॉस्पिटल फारुकिया मस्जिद और उस मिठाई दुकान से एक किलोमीटर दूर है, जहाँ दिलबर नेगी काम करता था।

चार्जशीट में कहा गया है कि 15 जनवरी के बाद से ही फारुकिया मस्जिद से कई वक्ताओं ने मुसलमानों को उकसाना शुरू कर दिया था। यहाँ पर अवैध रूप से CAA और NRC का विरोध चल रहा था, जिसमें अलग-अलग तारीख में भाषण देकर मुसलमानों को यह कहा जाता था कि NRC लागू होने के बाद उन्हें नागरिकता नहीं दी जाएगी, उन्हें डिटेंशन कैंप में डाल दिया जाएगा।

चार्जशीट के अनुसार, फारुकिया मस्जिद में होने वाले विरोध-प्रदर्शन के आयोजक अरशद प्रधान और अल हिन्द हॉस्पिटल के मालिक डॉक्टर एमए अनवर थे। पुलिस ने चार्जशीट में 12 लोगों को आरोपित बनाया है। ये सभी न्यायिक हिरासत में हैं। इनकी पहचान मोहम्मद शाहनवाज उर्फ शानू, मोहम्मद फैजल, आजाद, अशरफ अली, राशिद उर्फ मोनू, शाहरुख, मोहम्मद शोएब, परवेज, राशिद उर्फ राजा, मोहम्मद ताहिर, सलमान और सोनू सैफी के रूप में हुई है।

चार्जशीट में अनवर का नाम आने के बाद अब एनडीटीवी इसे बचानें के लिए जुट गया है, एनडीटीवी अपनी रिपोर्ट में अनवर को मसीहा बता रहा है, महान बताया जा रहा है, खुदा का नेक बन्दा बताया जा रहा है, एनडीटीवी के मुताबिक़, अनवर ने दंगों में घायल 600 से ज़्यादा पीड़ितों का मुफ़्त इलाज किया, किसी का हाथ तलवार से काटा गया था , किसी को पत्थरों से मारा गया था.. दिल्ली पुलिस को लगता है कि डॉ अनवर दंगों की साज़िश में शामिल थे, उनका नाम एक चार्जशीट में है.

जानकारी के अनुसार उत्तराखंड का रहने वाला दिलबर नेगी दिल्ली के ब्रिजपुरी में अनिल स्वीट शॉप में काम करता था, दंगों के दौरान दंगाइ अपनी टीम के साथ आये और दिलबर के दोनों हाथ काट कर बुरी तरह हत्या की थी और उसे दुकान के अंदर जिन्दा जला दिया था। पुलिस ने जली हुयी बॉडी बरामद की थी। दिलवर अपने परिवार को गरीबी से बाहर निकालने का सपना लिए उत्तराखंड से दिल्ली आया था और महज 20 साल की उम्र में वो दंगाइयों के हाथों बेरहमी से मारा गया।

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