मुहम्मद पर बनी फिल्म से भयभीत क्यों हैं मुस्लिम संगठन, उद्धव सरकार ने क्यों की बैन की मांग

मुंबई, 16 जुलाई: आये दिन किसी ने किसी फिल्म को लेकर विवाद होता रहता है, अब फिल्म ‘मुहम्मद: द मैसेंजर ऑफ गॉड’ सुर्ख़ियों में है, इस फिल्म को बैन करानें के लिए मुस्लिम संस्था रज़ा और महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार तमाम वो कोशिश कर रहे हैं जिससे ये फिल्म बैन हो सके ताकि पर्दे पर लोग मुहम्मद पैगंबर का चरित्र न देख सकें।

बता दें कि ‘मुहम्मद: द मैसेंजर ऑफ गॉड’ फिल्म की कहानी पैगंबर मुहम्मद के बचपन के इर्द-गिर्द है। ये फिल्म मुस्लिम देश ईरान में बनी है, आगामी 21 जुलाई को रिलीज़ होने वाली है,इस फिल्म को एक मुस्लिम शख्स माजिद मजीदी ने ही बनाय है, ईरान जैसे इस्लामिक देश में चलाई भी जा चुकी है और वहां इस फिल्म से कोई समस्या नहीं हुई, जबसे इस फिल्म को हिंदी में डब कर हिंदुस्तान में रिलीज करने की खबर आई तब से ही मुस्लिम संगठन रज़ा अकादमी ने इसका विरोध शुरू दिया।

मुस्लिम संस्था रज़ा अकादमी ने शिकायत की थी जिसकी शिकायत पर उद्धव सरकार फौरन एक्शन में आ गई और केंद्र सरकार से फिल्म को बैन करने की मांग कर दी। हालाँकि ये फिल्म बैन होगी या नहीं अभी इसपर कोई फैसला नहीं हुआ है।

रजा एकेडमी की शिकायत को संज्ञान में लेते हुए महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने केंद्र सरकार को एक पत्र लिखकर फिल्म पर बैन लगानें की मांग की गई है। रजा एकेडमी और उद्धव सरकार का मानना है कि इस फिल्म से धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं और कानून व्यवस्था भी बिगड़ सकती है।

दरअसल इस्लाम में पैगंबर हजरत मुहम्मद (सल्ल) के किसी भी तरह के चित्र बनाने की इजाजत नहीं है। अब पैगंबर मोहम्मद ने बचपन में ऐसा पता नहीं क्या किया थे जिसे मुस्लिम छुपाना चाहते हैं। अब जब फिल्म के जरिये पैगंबर का चरित्र सामनें आने वाला है तो मुस्लिम संगठन आनें नहीं देना चाह रहे हैं। फिल्म को बैन करानें के लिए तमाम कोशिशें कर रहे हैं, हालाँकि ईरान भी मुस्लिम देश हैं। वहां भी इस्लाम के ही अनुयायी है, लेकिन वहां इस फिल्स से किसी को दिक्क्त नहीं हुई। भारत में ही पता नहीं क्यों मुस्लिम संगठन इसे बैन करनें की मांग कर रहे हैं। राज गहरा लगता है, अगर फिल्म रिलीज हुई तो सारे राज बाहर आने तय हैं।