5 अगस्त को होगा भूमिपूजन, जानिये रामजन्मभूमि आन्दोलन के महानायक अशोक सिंघल के बारे में

अयोध्या, 29 जुलाई: सैकड़ों वर्षों से चला आ रहा इन्तजार अब ख़त्म हुआ, 5 अगस्त को भूमिपूजन को होगा और उसके बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा। कई ऐसे महानायक रहे हैं जिन्होनें रामजन्मभूमि आंदोलन में बहुत महत्वपूर्ण निभाई! अफ़सोस इनमें से कुछ महानायक आज हमारे बीच में नहीं हैं इन्हीं में से एक हैं अशोक सिंघल, जी हाँ!

अयोध्या रामजन्मभूमि के प्रणेता और विश्व हिन्दू परिषद् के नेता स्वर्गीय अशोक सिंघल एक अतिसंपन्न परिवार से आने के बाद भी सभी सुख और वैभव को त्याग कर जीवन भर एक सन्यासी के रूप में देश और धर्म की सेवा की। राम जन्मभूमि व रामसेतु आन्दोलन और धर्म जागरण के लिए उनका संघर्ष वन्दनीय था। आइये जानते हैं अशोक सिंघल के बारे में.

अशोक सिंघल का जन्म 15 सितम्बर 1926 को आगरा में हुआ था। उनके पिता एक सरकारी दफ्तर में कार्यरत थे। 1942 में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। उन्होने 1950 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) से इंजीनियरिंग पूरी की। इसके बाद इंजीनियर की नौकरी करने के बजाये उन्होंने समाज सेवा का मार्ग चुना और आगे चलकर आरएसएस के पूर्णकालिक प्रचारक बन गये।

1975 से 1977 तक देश में आपातकाल और संघ पर प्रतिबन्ध रहा। इस दौरान अशोक सिंघल इंदिरा गांधी की तानाशाही के विरुद्ध हुए संघर्ष में लोगों को जुटाते रहे। आपातकाल के बाद वे दिल्ली के प्रान्त प्रचारक बनाये गये। 1981 में डा. कर्ण सिंह के नेतृत्व में दिल्ली में एक विराट हिन्दू सम्मेलन हुआ पर उसके पीछे शक्ति अशोक सिंघल और संघ की थी। उसके बाद अशोक सिंघल को विश्व हिन्दू परिषद् के काम में लगा दिया गया।

इसके बाद परिषद के काम में धर्म जागरण, सेवा, संस्कृत, परावर्तन, गोरक्षा आदि अनेक नये आयाम जुड़े। इनमें सबसे महत्त्वपूर्ण है श्रीराम जन्मभूमि मंदिर आन्दोलन, जिससे परिषद का काम गाँव-गाँव तक पहुँच गया। इसने देश की सामाजिक और राजनीतिक दिशा बदल दी। 17 नवंबर 2015 को हरियाणा के गुरुग्राम में निधन हो गया।

बता दें कि भूमि पूजन में तीर्थराज प्रयागराज के त्रिवेणी संगम की मिट्टी और जल का भी इस्तेमाल किया जाएगा. विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता 29 जुलाई को संगम पर पूजा-अर्चना कर वहां की मिट्टी और जल इकठ्ठा करेंगे. संगम की मिट्टी और जल को इकठ्ठा करने का कार्यक्रम तकरीबन 2 घंटे तक चलेगा। संगम की मिट्टी और जल को सीधे तौर पर अयोध्या नहीं ले जाया जाएगा. संगम पर पूरे विधि विधान के साथ इकठ्ठा किए जाने वाले जल और मिट्टी को अयोध्या ले जाने से पहले उसे प्रयागराज में ही वीएचपी के मुखिया रहे दिवंगत अशोक सिंघल के आवास पर ले जाया जाएगा. अशोक सिंघल के आवास पर यह मिट्टी और जल दोपहर से रात तक लोगों के दर्शनार्थ रखा जाएगा. तमाम साधु-संत और वीएचपी कार्यकर्ताओं के साथ ही बड़ी संख्या में राम भक्त स्वर्गीय अशोक सिंघल के आवास पर इस मिट्टी और जल का दर्शन करेंगे।

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