टिक-टॉक बैन होनें के बाद सुलग उठे प्रशांत भूषण, गांधी, मोहम्मद समेत कई लोग

नई दिल्ली, 30 जून: केंद्र की मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए सोमवार ( 29 जून 2020 ) को टिक-टॉक समेत 59 चाइनीज एप पर बैन लगा दिया। इसमें प्रमुख रूप से टिक-टॉक, हेलो, यूसी ब्राउजर, वी चैट समेत 59 चाइनीज एप शामिल हैं। सरकार ने यह फैसला ऐसे वक्त में लिया जब LAC पर चीन के साथ तनातनी चल रही है।

टिक-टॉक समेत 59 चाइनीज ऐप होनें के बाद एक तरफ पूरे देश में ख़ुशी की लहर है तो वहीँ कुछ लोग अब टिक-टॉक के समर्थन में विधवा विलाप भी करनें लगे हैं. जी हाँ! टिक-टॉक के साथ सहानुभूति दिखा रहे हैं।

ट्विटर पर सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत भूषण, कथित फैक्ट चेकर वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ वाले मोहम्मद जुबैर समेत कई लोग ट्विटर के समर्थन में ट्वीट कर रहे हैं और कह रहे हैं टिक-टॉक ने पीएम केयर्स फंड में जो 30 करोड़ दान किया है मोदी सरकार उसे वापस करे।

अब इन चाइनीज सपोर्टरों को कौन बताये कि भारत से हजारों करोड़ कमानें के बाद ही टिक-टॉक ने पीएम केयर्स फंड में 30 करोड़ डोनेट किया है, फिर भी ये लोग टिक-टॉक के प्रति सहानुभूति दिखा रहे हैं।

बैन होनें के बाद टिक-टॉक इंडिया के हेड निखिल गांधी ने सफाई दी है, गांधी ने कहा कि बताया कि हम भारतीय कानून के तहत डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा के सभी नियमों का पालन कर रहे हैं। हमने चीन समेत किसी भी विदेशी सरकार के साथ भारतीय यूजर्स की जानकारी शेयर नहीं की है। अगर भविष्य में भी हमसे अनुरोध किया जाता है तो हम ऐसा नहीं करेंगे। हम यूजर की निजता की अहमियत समझते हैं, मतलब गांधी चाहते हैं भारत सरकार अपना फैसला बदले।

आईटी मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि बैन किये गए ऐप्स कुछ ऐसी गतिविधियों में संलिप्त हैं जो भारत की रक्षा, ​सुरक्षा और पब्लिक की संप्रुभता और अखंडता के लिए हानिकारक है, इसलिए इन्हें भारत में बैन कर दिया गया। गौरतलब है कि भारत में टिक-टॉक समेत सभी चाइनीज एप्स यूज करनें वालों का डेटा सीधा चाइना जाता था। चीन उस डेटा का क्या करता था कोई पता नहीं रहता था। इन अप्स से चीन की अच्छी खासी कमाई भी होती थी लेकिन भारत ने सोमवार को चीन पर डिजिटल स्ट्राइक कर दी।

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