कांग्रेस से भी थे सफूरा जरगर के रिश्ते, जामिया में NSUI की रह चुकी है जनरल सेक्रेटरी

नई दिल्ली, 7 जून: गैरक़ानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम ( UAPA) के तहत तिहाड़ जेल में बंद सफूरा जरगर के बारे में बड़ा खुलासा हुआ है। जी हाँ! सफूरा जरगर के कांग्रेस से भी रिश्ते रह चुके हैं। गौरतलब है की दिल्ली पुलिस ने सफूरा जरगर को फ़रवरी 2020 में दिल्ली में हुए दं’गे में शामिल होनें के आरोप में गिरफ्तार किया है, सफूरा जरगर की कोर्ट से तीन बार जमानत याचिका खारिज हो चुकी है।

मूल रूप से जम्मू कश्मीर की रहने वाली सफूरा जरगर कांग्रेस की छात्र इकाई ‘नेशनल स्टूडेंट्स ऑफ इण्डिया” ( NSUI ) की जनरल सेक्रेटरी रह चुकी हैं। जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिट की महासचिव थी।

सफूरा जरगर ने अप्रैल 2018 में एक ट्वीट किया था जिसमें वो NSUI का बैनर लेकर खड़ी हुई दिखाई दे रही हैं, ऑपइण्डिया के मुताबिक़, ट्वीट में सफूरा ने NSUI के नेशनल सेक्रेटरी गुलजेब अहमद को भी टैग कर रखा है। इससे साफ़ होता है की, सफूरा जरगर के कांग्रेस से रिश्ते थे। शायद इसीलिए आजकल कांग्रेस नेता सलमान निजामी सफूरा जरगर को जमानत दिलानें के लिए तड़फड़ा रहे हैं। स्वास्थ्य का हवाला दे रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सफूरा जरगर तीन महीनें की गर्भवती हैं। इससे पहले सफूरा जरगर ने जनवरी 2017 में एक ट्वीट किया था उसमें भी उन्होंने NSUI को टैग किया था।

ऑपइण्डिया वेबसाइट पर छपे आर्टिकल के मुताबिक़, सफूरा जरगर 2 साल पहले तक यानि मई 2018 तक कांग्रेस के NSUI के जामिया यूनिट की जनरल सेक्रेटरी थी, उसी महीनें टीम को भंग कर दिया गया था, लेकिन तब वो पद पर बनी रही थी, यहीं नहीं सफूरा NSUI के विभिन्न कार्क्रमों में शिरकत करती थी और इसके नेताओं से मिलती थी।

बता दें कि, सफूरा जरगर को दिल्ली पुलिस ने 10 अप्रैल को गैरक़ानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम ( UAPA) के तहत गिरफ्तार किया था। सफूरा जरगर पर इसी साल फ़रवरी में उत्तरी-पूर्वी दिल्ली में हुई साम्प्रदायिक हिंसा में शामिल होनें का और साजिश रचनें का आरोप है। सफूरा जरगर 3 महीनें की प्रेग्नेंट भी है, सफूरा जरगर ने स्वास्थ्य का हवाला देकर पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दायर कर जमानत की गुहार लगाई थी, लगभग 4 घंटे चली बहस के बाद न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने जमानत देने से इनकार कर दिया।

पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त स्तर न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने सफूरा जरगर की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा की, आरोपी (सफूरा ) प्रत्यक्ष रूप से हिंसा न की हो लेकिन वह UAPAके तहत अपनें दायित्व से बच नहीं सकती।