फैक्ट चेक: मकबूल, असीम खान समेत आयुष मंत्रालय के 6 वैज्ञानिकों ने बाबा रामदेव की दवा पर लगाई रोक

नई दिल्ली, 27 जून: कोरोना वायरस का प्रकोप देशभर में जारी है, दुनिया का कोई भी देश अभी तक वैक्सीन नहीं ढूढ़ पाया है। इन सब के बीच योगगुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि ने कोरोना दवा बनानें का दावा किया और कोरोना की आयुर्वेदिक दवा ‘कोरोनिल टैबलेट’ लॉन्च की परन्तु आयुष मंत्रालय ने पतंजलि की दवा कोरोनिल से किनारा काट लिया है।

भारत सरकार के अंतर्गत आने वाला आयुष मंत्रालय ने पतंजलि की दवा कोरोनिल से किनारा काट लिया है, आयुष मंत्रालय ने कहा है कि उसे इस दवा के संबंध में तथ्‍यों के दावे और वैज्ञानिक शोध के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। इसके साथ ही आयुष मंत्रालय ने पतंजलि आयुर्वेद की ओर से दवा के दावों का विज्ञापन और प्रचार बंद करने को कहा है।

आयुष मंत्रालय द्वारा कोरोनिल दवा के प्रचार-प्रसार पर रोक लगाए जानें के बाद तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामनें आ रही हैं। कुछ लोग इसे आयुर्वेद विरोधी कदम बताकर आयुष मंत्रालय की आलोचना कर रहे हैं तो कुछ बाबा रामदेव पर ही सवालिया निशान दाग रहे हैं। इन सब के बीच ट्विटर पर एक जानकारी सामनें आई जिसमें दावा किया गया कि आयुष मंत्रालय में दवाईयों पर रिसर्च और अप्रूवल देने वाले साइंटिफिक पैनल के टॉप 6 साइंटिस्ट मुस्लिम हैं। ट्वीट में सभी के नाम भी संलग्न थे।

दीक्षा पांडेय नाम की एक ट्विटर यूजर ने अपनें ट्वीट में लिखा था – आयुष मंत्रालय में दवाईयों पर रिसर्च और अप्रूवल देने वाले साइंटिफिक पैनल के टॉप 6 साइंटिस्टों का नाम पढ़िए।

•असीम खान
•मुनावर काजमी
•खादीरुन निशा
•मकबूल अहमद खान
•आसिया खानुम
•शगुफ्ता परवीन

बाकी समझ जाईये की रामदेव के कोरोनिल दवा पर रोक क्यों लगी थी, यही है सिस्टम जिहाद.?

सच्चाई क्या है।

सोशल मीडिया पर ये सूचना तेजी से वायरल होनें के बाद प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो ( PIB ) फैक्ट चेक ने इसे गलत बताया है। पीआईबी ने अपनें ट्वीट में लिखा, एक ट्वीट में आरोप लगाया गया है कि आयुष मंत्रालय के वैज्ञानिक पैनल के कुछ व्यक्ति, कोरोना की एक कथित दवाई की स्वीकृति पर रोक लगा रहे हैं। लेकिन पीआईबी फैक्ट चेक ने अपनीं जाँच पड़ताल में पाया कि आयुष मंत्रालय में बैज्ञानिकों का ऐसा कोई पैनल है ही नहीं।

 

loading...