सर्दी-खांसी की दवा का लाइसेंस लेकर बाबा रामदेव ने बनाई कोरोना की दवा, पतंजलि को भेजा गया नोटिस

नई दिल्ली, 24 जून: देश-दुनिया में पिछले कई महीनों से कोरोना वायरस कहर बरपा रहा है, दुनियाभर के बड़े-बड़े वैज्ञानिक जुटे हैं कोरोना की वैक्सीन ढूढनें में लेकिन अभी किसी को सफलता नहीं प्राप्त हुई लेकिन ‘पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट’ ने कोरोना की दवा बनानें का दावा किया है और बाबा रामदेव ने मंगलवार को कोरोना की आयुर्वेदिक दवा ‘कोरोनिल टैबलेट’ लॉन्च की है। परन्तु आयुष मंत्रालय ने इस दवा के प्रचार-प्रसार पर रोक लगा दी है। वहीँ उत्तराखंड आयुर्वेद विभाग ने भी बाबा रामदेव की दवा पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

उत्तराखंड आयुर्वेद विभाग के लाइसेंस ऑफिसर ने कहा कि पतंजलि के आवेदन के अनुसार हमने उन्हें लाइसेंस जारी किया। उन्होंने कोरोना वायरस की बात नहीं बताई थी। हमने केवल इम्युनिटी बूस्टर, कफ और बुखार के लिए लाइसेंस जारी किया था।

रावत ने बताया कि उन्हें मीडिया के माध्यम से ही पता चला कि बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि द्वारा कोरोना की किसी दवा का दावा किया जा रहा है जबकि उन्हें इम्युनिटी बढ़ाने वाली और खांसी-जुकाम की दवा के लिए लाइसेंस जारी किया गया था।

वहीँ इससे पहले भारत सरकार के अंतर्गत आने वाला आयुष मंत्रालय ने पतंजलि की दवा कोरोनिल से किनारा काट लिया है, आयुष मंत्रालय ने कहा है कि उसे इस दवा के संबंध में तथ्‍यों के दावे और वैज्ञानिक शोध के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। इसके साथ ही आयुष मंत्रालय ने पतंजलि आयुर्वेद की ओर से दवा के दावों का विज्ञापन और प्रचार बंद करने को कहा है।

बता दें कि आयुर्वेदिक दवा ‘कोरोनिल’ को लॉन्च करते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि जब कहीं क्लिनिकल कंट्रोल ट्रायल होता है तो कई अप्रूवल लेने होते हैं। इस दवा के लिए भी तमाम नैशनल एजेंसियों से अप्रूवल लिए गए। इस दवा का ट्रायल 280 मरीजों पर किया गया है। बाबा ने बताया कि कोरोना वायरस की यह कोरोनिल नामक दवा एक आयुर्वेदिक दवा है. इस दवा में सिर्फ देसी सामान मिलाया गया है। इस दवा को मुलैठी, गिलोय, अश्वगंधा, तुलसी, श्वासारि आदि की मदद से तैयार किया गया है।

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