शांतिप्रिय समुदाय ने फूंक दी दलित बस्ती, सोशल मीडिया ने पूछा- कहाँ हैं जय भीम-जय मीम वाले

जौनपुर 11 जून: कुछ स्वघोषित दलितों के ठेकेदारों ने कम जागरूप दलितों को पहले मूर्ख बनाया, फिर हिन्दुओं के खिलाफ भड़काया, उसके बाद नारा दिया दलित-मुस्लिम एकता जिंदाबाद। लेकिन ये दलित-मुस्लिम एकता जिंदाबाद का नारा ज्यादा दिन तक नहीं चल सका, ध्वस्त हो गया। इसका सबसे जीता-जागता उदाहरण उत्तर प्रदेश के जौनपुर से आया है, जी हाँ!

जौनपुर में मामूली सी बात पर समुदाय विशेष के सैकड़ों लोगों ने दलित बस्ती पर धावा बोल दिया। कई घरों को आग के हवाले कर दिया, जमकर तोड़फोड़ की। पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्यवाही करते हुए 35 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इतनी बड़ी घटना होनें के बावजूद दलितों के ठेकेदार चुप हैं। सोशल मीडिया ने चुप्पी साधनें वालों पर सवाल उठाया है।

बता दें की, दलितों की बस्ती फूंके जाने पर अभी तक न तो मायावती ने कोई ट्वीट किया है, न भीम आर्मी वाले चंद्रशेखर रावण ने, न उदित राज ने और न ही सोनिया गांधी ने कोई बयान जारी किया है। सब खामोश हैं।

भाजपा नेता रविवार भदौरिया ने ट्वीट में लिखा है – जौनपुर की दलित बस्ती को जि’हा’दि’यों द्वारा फूंके जाने पर तथाकथित दलित प्रेमी और जय भीम-जय मीम के नारे लगाने वाले इसलिए चुप हैं। क्योंकि ये सब कन्वर्टेड जि’हा’दी अथवा मिशनरी ही हैं। जो अभी तक मात्र दलित होने का दिखावा कर रहे हैं।

अजय सेंगर नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा है, जौनपुर मे दलित बस्ती को नमा’ज़ि’यों ने फूँक दी पर दलितों के नाम पर राजनीति करने वाले सारे दलित चिंतक कांग्रेस, मायावती, भीम आर्मी, JNU गैंग उदितराज, दिलीप मंडल ये सब मौन धारण किये हुए है, आखिर क्यों?

इसी तरह दिल्ली बीजेपी आईटी सह संयोजक अभिषेक आचार्य कुलश्रेष्ठ नाम के ट्विटर यूजर ने लिखा है, जौनपुर में मु’स्लि’मों ने दलितों के घर जला दिये, पर अपने आप को दलितों के मसीहा बताने वाली मायावती, उदित राज जैसे फर्जी दलित नेता चुप है एक बार तक इन्होंने दलितों के लिये आवाज़ नही उठाई, आवाज उठाई और एक्शन लिया तो योगी सरकार ने जिन्होंने रासुका के तहत कार्यवाही का आदेश दिया है।

वहीँ सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत पटेल ने इस पूरी घटना का वीडियो ट्वीट किया है, जिसमें साफ़-साफ़ देखा जा सकता है की, उपद्रवी कैसे दलित बस्ती को फूंक रहे हैं।

क्या है पूरा मामला।
मीडीया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जौनपुर के सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के भदेही गाँव में मंगलवार ( 9 जून 2020 ) शाम को भैंस चरानें के विवाद में दो समुदाय के लोगों के बीच झगड़ा हो गया। प्रधानपति आफताब उर्फ हिटलर ने उस वक्त झगड़े को शांत करा दिया। पीड़ितों का आरोप है कि रात आठ बजे प्रधानपति, उसके लड़के व सलीम ने 400 के साथ दलित बस्ती पर हमला बोल दिया।

पीड़ित के मुताबिक़, हमलावरों ने नंदलाल, नींबूलाल, फिरतू, राजाराम, जीतेन्द्र, सेवालाल सहित 12-13 लोगों के मड़हों में आग लगाकर तोड़फोड़ की। कई वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया, आग की चपेट में आने से तीन बकरियों व एक भैंस की मौत हो गई। डीएम व एसपी मंगलवार रात ही घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंच गए थे. प्रसाशन ने पीड़ितों को 5000 रुपये और राशन उपलब्ध कराया।

पुलिस अधीक्षक ( एसपी ) ने जानकारी देते हुए बताया कि भदेठी कांड में 35 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. डीएम ने कहा कि यह बहुत बड़ी घटना है. जिन लोगों के मकान जलाए गए हैं उनकी सुरक्षा, रहने व खाने-पीने की व्यवस्था प्रशासन करेगा।

वहीँ इस पूरे मामलें पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सख्त हो गए हैं। सीएम ने आरोपियों पर तत्काल एनएसए लगानें का आदेश दिया है। बता दें की, इस पूरी घटना के मास्टरमाइंड नूर आलम और जावेद सिद्दीकी हैं, जावेद सपा नेता भी है अखिलेश यादव से करीबी सम्बन्ध बताये जा रहे हैं इसके।