जौनपुर: दलितों पर हुई बर्बरता, मायावती, प्रियंका, अखिलेश और भीम आर्मी के मुंह से एक शब्द नहीं निकला

जौनपुर, 12 जून: उत्तर प्रदेश के जौनपुर में मामूली सी बात पर समुदाय विशेष के सैकड़ों लोगों ने दलित बस्ती पर धावा बोल दिया। कई घरों को आग के हवाले कर दिया, जमकर तोड़फोड़ की। इस मामलें में यूपी पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्यवाही करते हुए 35 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इतनी बड़ी घटना होनें के बावजूद दलितों के ठेकेदार चुप हैं, दलितों के नाम पर राजनीतिक रोटियां सेंकनें वाले भी खामोश हैं, बयान देना तो दूर की बात मायावती, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी वाड्रा और स्वघोषित दलितों की मसीहा भीम आर्मी ने एक ट्वीट तक नहीं किया।

दलितों के साथ हुई बर्बरता पर मायावती, अखिलेश यादव, प्रियंका गांधी वाड्रा और स्वघोषित दलितों की मसीहा भीम आर्मी की चुप्पी बड़ा सवाल खड़ा करती है, क्या आरोपी समुदाय विशेष के हैं इसलिए ये सब खामोश हैं, क्या इन नेताओं का मकसद ये है कि, प्रदेश चाहे तबाह हो जाए, मुसलमानों पर आंच न आये। सोशल मीडिया पर भी लगातार इन नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाये जा रहे हैं।

हमनें बसपा अध्यक्ष मायावती, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और भीम आर्मी के मुखिया चंद्रशेखर रावण का ट्विटर हैंडल चेक किया। इन नेताओं ने जौनपुर में दलितों पर हुई बर्बरता पर एक भी ट्वीट नहीं किया है।

अगर प्रदेश में कहीं और दलित हिन्दुओं के साथ बर्बरता हुई होती और आरोपी हिन्दू होते तो अबतक ये नेता दर्जनों ट्वीट करते, प्रेस-कॉन्फ्रेंस करते, न्याय की मांग करते। आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलानें की मांग करते, लेकिन जौनपुर में आरोपी समुदाय विशेष के हैं, इसलिए ये नेता न कोई ट्वीट कर रहे हैं और न कोई बयान दे रहे हैं, चुप्पी साधकर बैठे हैं।

जौनपुर में दलितों पर हुई बर्बरता का एक वीडियो सामनें आया है, वीडियो में समुदाय विशेष के लोग दलित बस्ती में आग लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है की, दंगाइयों की दलितों को घरों में जिन्दा जलानें की साजिश थी लेकिन सतर्कता के चलते ऐसा नहीं हो सका.

क्या है पूरा मामला।
मीडीया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जौनपुर के सरायख्वाजा थाना क्षेत्र के भदेही गाँव में मंगलवार ( 9 जून 2020 ) शाम को भैंस चरानें के विवाद में दो समुदाय के लोगों के बीच झगड़ा हो गया। प्रधानपति आफताब उर्फ हिटलर ने उस वक्त झगड़े को शांत करा दिया। पीड़ितों का आरोप है कि रात आठ बजे प्रधानपति, उसके लड़के व सलीम ने 400 के साथ दलित बस्ती पर हमला बोल दिया।

पीड़ित के मुताबिक़, हमलावरों ने नंदलाल, नींबूलाल, फिरतू, राजाराम, जीतेन्द्र, सेवालाल सहित 12-13 लोगों के मड़हों में आग लगाकर तोड़फोड़ की। कई वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया, आग की चपेट में आने से तीन बकरियों व एक भैंस की मौत हो गई। डीएम व एसपी मंगलवार रात ही घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंच गए थे. प्रसाशन ने पीड़ितों को 5000 रुपये और राशन उपलब्ध कराया।

पुलिस अधीक्षक ( एसपी ) ने जानकारी देते हुए बताया कि भदेठी कांड में 35 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. डीएम ने कहा कि यह बहुत बड़ी घटना है. जिन लोगों के मकान जलाए गए हैं उनकी सुरक्षा, रहने व खाने-पीने की व्यवस्था प्रशासन करेगा।

वहीँ इस पूरे मामलें पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सख्त हो गए हैं। सीएम ने आरोपियों पर तत्काल एनएसए लगानें का आदेश दिया है। बता दें की, इस पूरी घटना के मास्टरमाइंड नूर आलम और जावेद सिद्दीकी हैं, जावेद सपा नेता भी है अखिलेश यादव से करीबी सम्बन्ध बताये जा रहे हैं इसके।

नोट – ये लेखक के निजी विचार हैं।