आशुतोष के जख्मों पर रोहित सरदाना ने रगड़ा नमक, कहा- आप वो आदमी हैं जिसे एक नेता ने थप्पड़ जड़ा था

नई दिल्ली, 25 जून: 45 साल पहले 25 जून 1975 को आज ही के दिन कांग्रेस नेत्री और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने देश को आपातकाल की आग में झोंक दिया था। आज के लोग कल्पना भी नहीं कर सकते उस वक्त आपातकाल में कैसा ख़ौफ़ था। जी हाँ!

आपातकाल की 45वीं बरसी पर ‘आजतक न्यूज़ चैनल’ पर डिबेट चल रही थी, इस दौरान एंकर रोहित सरदाना ने पूर्व आप नेता आशुतोष के जख्मों को हरा करते हुए थप्पड़ काण्ड की याद दिला दी। दरअसल एंकर और पत्रकार रोहित सरदाना ने आशुतोष से पूछा, क्या देश में बोलने की आजादी नहीं है। बताते चलें कि आम आदमी पार्टी छोड़नें के बाद आशुतोष ने ‘सत्यहिंदी’ न्यूज़ पोर्टल की शुरुवात की और अब ‘सत्यहिंदी’ पर, ट्विटर अकॉउंट पर, फेसबुक पर लिखते हैं इस समय देश में बोलने की आजादी नहीं है, इसी परिपेक्ष्य में रोहित सरदाना ने आशुतोष से पूछा, क्या देश में बोलने की आजादी नहीं है। आज बोल के बताइये टीवी पर।

रोहित सरदाना के सवालों का जवाब देते हुए आशुतोष ने कहा कि आज की तारीख में हिंदुस्तान का मीडीया स्वतंत्र नहीं है, किसी भी चैनल एकात-दो को छोड़कर किसी में हिम्मत नहीं है कि प्रधानमंत्री से सवाल कर सके। इसके बाद सरदाना ने जवाब देते हुए कहा, आपके हिसाब से जब आप टीवी पर बैठकर अन्ना हजारे का प्रचार कर रहे थे तब मीडिया स्वतंत्र था।

आशुतोष ने कहा, जो गलती कांग्रेस पार्टी ने 1975 में की थी, देश आज उसी तरह की स्थितियों से गुजर रहा है, आशुतोष ने कहा आपातकाल हिंदुस्तान के माथे पर कंलक था लेकिन ये सच है कि आज भी मीडिया स्वतंत्र नहीं है. आशुतोष को जवाब देते हुए रोहित सरदाना ने कहा कि आप इस चैनल ( आजतक ) पर बैठकर सवाल पूछते हैं किसी ने रोका आपको। इसके बाद दोनों लोगों के बीच काफी देर तक तीखा टिप्पणी चलती रही।

इसी दौरान रोहित सरदाना ने आशुतोष के जख्मों को हरा करते हुए कहा कि, आप वो आदमी हैं जिसे एक नेता ने थप्पड़ जड़ दिया था। बता दें कि आज से कई वर्ष पहले 1996 में दलित नेता कांशीराम के आवास के बाहर पत्रकाराें की भीड़ जमा थी, कई जर्नलिस्ट कमरे में घुसकर इंटरव्‍यू करने को उतारू थे। तभी कांशीराम को घर से बाहर निकलते देखा तो बाइट लेने के लिए उनकी ओर दौड़ पड़े। इसी दौरान नाराज कांशीराम ने आशुतोष को झन्नाटेदार थप्पड़ जड़ दिया। आशुतोष को कोई न कोई थप्पड़ काण्ड की याद समय-समय से दिलाता रहता है।

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