आज ही के दिन इंदिरा गांधी ने अपनीं कुर्सी बचानें के लिए लगाया था आपातकाल, लोगों पर बहुत जुल्म हुए

25 जून 1975 भारत के इतिहास में सबसे काले अक्षरों में लिखा जायेगा, 45 साल पहले आज ही के दिन कांग्रेस नेत्री और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने देश को आपातकाल की आग में झोंक दिया था। आज के लोग कल्पना भी नहीं कर सकते उस वक्त आपातकाल में कैसा ख़ौफ़ था। जी हाँ! इंदिरा गांधी ने ये सब काला कारनामा अपनी कुर्सी बचानें के लिए किया था।

इंदिरा गांधी ने क्यों लगाया आपातकाल

दरअसल वर्ष 1971 के चुनाव में इंदिरा गांधी ने अपनी पार्टी को जीत दिलाई थी और खुद भी बड़े बहुमत से जीती थीं। इंदिरा गांधी की जीत पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ रायबरेली लोकसभा सीट से चुनाव चुनाव लड़नें वाले संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के उम्मीदवार राजनारायण अदालत पहुँच गए, अपनी याचिका में राजनारायण ने आरोप लगाया था कि इंदिरा गांधी ने चुनाव जीतने के लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल किया है। मामले की सुनवाई हुई और इंदिरा गांधी के चुनाव को निरस्त कर दिया गया। इस फैसले से क्रोधित होकर ही इंदिरा गांधी ने इमर्जेंसी लगाने का फैसला लिया।

कोर्ट के फैसले से इंदिरा गांधी इतना क्रोधित हो गई थीं कि अगले दिन ही उन्होंने बिना कैबिनेट की औपचारिक बैठक के आपातकाल लगाने की अनुशंसा राष्ट्रपति से कर डाली, जिस पर राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने 25 जून और 26 जून की मध्य रात्रि में ही अपने हस्ताक्षर कर डाले और इस तरह देश में आपातकाल लागू हो गया।

आज से 45 साल पहले लगा ये आपातकाल 25 जून, 1975 से 21 मार्च, 1977 तक यानि 21 महीनों तक देश पर थोपा गया। अगली सुबह पूरे देश ने रेडियो पर इंदिरा की आवाज में संदेश सुना था, भाइयो और बहनो, राष्ट्रपति जी ने आपातकाल की घोषणा की है।

आपातकाल के दौरान अख़बारों की आज़ादी छीन ली गई, ज़बरन नसबंदियाँ हुईं, थानों में ज़ुल्म हुए, आज के लोग कल्पना भी नहीं कर सकते इमर्जेन्सी में कैसा ख़ौफ़ था, उस वक्त न प्राइवेट टीवी था, न सोशल मीडिया, लाखों लोग जेल में थे. अख़बारों पर सेंसर, अदालतों के गले में फंदा, पुलिस के ज़ुल्म, न बोलने की आज़ादी, न कोई अधिकार, 25 जून की रात से ही देश में विपक्ष के नेताओं की गिरफ्तारियां शुरू हो गई थी, जयप्रकाश नारायण, लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी, जॉर्ज फर्नाडीस आदि बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया गया था। जेलों में जगह नहीं बची थी। आपातकाल के बाद प्रशासन और पुलिस के द्वारा भारी टॉर्चर की कहानियां सामने आई थीं। भारत के इतिहास पर आपातकाल एक धब्बा है, इसकी जिम्मेदार इंदिरा गांधी थी।

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