कंगाल हुई केजरीवाल सरकार, दिल्ली वालों को अब कुछ भी मुफ्त नहीं मिलेगा?

नई दिल्ली, 2 जून: मुफ्त बिजली-पानी का वादा करके आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविन्द केजरीवाल तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बनें, ये किसी से छुपाये नहीं छुपा है। लेकिन अब दिल्ली वालों को शायद ही कुछ मुफ्त मिल पाए। इसका कारण यह है की केजरीवाल सरकार का खजाना खाली हो गया है, कर्मचारियों की सैलरी तक देने के पैसे नहीं है।

गौरतलब है की, कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री केजरीवाल दिल्ली को देश की सबसे मालामाल सरकार घोषित करनें का डंका बजा रहे थे लेकिन अब कंगाल होनें का नगाड़ा पीट रहे हैं, दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार से 5 हजार करोड़ रूपये की मदद मांगी है। सिसोदिया का कहना है की, कर्मचारियों के सैलरी देंने के पैसे नहीं हैं, संकट के समय में केंद्र सरकार हमारी मदद करें।

जब केजरीवाल सरकार के पास कर्मचारियों को तनख्वाह देने का पैसा नहीं है तो दिल्ली वालों को मुफ्त बिजली-पानी कहाँ से देंगें, अगर इस चिलचिलाती गर्मीं में दिल्ली वालों को मुफ्त बिजली पानी न मिला खासकर उनको जो यही सोंचकर ही वोट ही दिए थे आम आदमी पार्टी को तो अपनें आप को ठगा हुआ महसूस करेंगें।

बता दें की, कोरोना वायरस संकट से निपटनें के लिए हर व्यवस्था केंद्र सरकार ने की तो दिल्ली का खजाना कैसे खाली हो गया। आखिर मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने लॉकडाउन के दौरान दिल्लीवालों के लिए ऐसा क्या कर दिया की पूरा खजाना ही खाली हो गया और किसी राज्य ने तो हजारों करोड़ की मांग नहीं की केंद्र सरकार से।

गौरतलब है की सभी राज्यों को पीपीई किट केंद्र सरकार ने दी, जिसमें दिल्ली भी शामिल है। राशन केंद्र सरकार ने मुहैया करवाया, गरीब मजदूरों के खाते में पैसा केंद्र सरकार ने डाला। दिल्ली से पलायन कर रहे मजदूरों के लिए बसें उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने चलवाई। देशभर के मजदूरों की सुविधा के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें केंद्र सरकार ने चलाई। इसके अलावा दिल्ली सरकार के अधीन आने वाली DTC बसें फ्री में चली ही नहीं। और केजरीवाल सरकार ने कर्मचारियों को सैलरी दी नहीं तो दिल्ली सरकार का खजाना कैसे खाली हो गया। वैसे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को इन सब सवालों का जवाब देना चाहिए। हाँ! केजरीवाल सरकार ने अख़बारों और न्यूज़ चैनलों में खूब विज्ञापन दिए।

बता दें कि, दिल्ली से उत्तर प्रदेश, बिहार और उड़ीसा की जनसंख्या किए गुना ज्यादा है। इन तीनों राज्यों को अपने पुलिस बल का खर्च भी स्वयं उठाना पड़ता है। जबकि दिल्ली को यह नहीं उठाना पड़ता है। उत्तर प्रदेश, बिहार व उड़ीसा की आर्थिक स्थिति भी उतनी अच्छी नहीं है। लेकिन इसके बावजूद इन तीनों राज्यों में से किसी ने भी यह रोना नहीं रोया कि हमारी सरकार इतनी कंगाल हो गई है कि कर्मचारियों को वेतन नहीं दे सकती। यही नहीं ये तीनों राज्य कोरोना संकट के दौरान लाखों मजदूरों का किराया देकर उन्हें अपने राज्य में वापस लेकर आए और करोड़ों गरीबों को सीधी आर्थिक मदद भी। फिर भी केंद्र सरकार के आगे हाथ नहीं फैलाया, लेकिन केजरीवाल ने फैला दिया।

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