बड़ा सवाल: राशन, PPE किट केंद्र ने दिया, फ्री DTC चली नही तो दिल्ली का खजाना खाली कैसे हुआ?

नई दिल्ली, 1 जून: दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने केंद्र सरकार से हजारों करोड़ रूपये की मांग की है। केजरीवाल सरकार का कहना है की, कर्मचारियों को सैलरी देनें के लिए हमनें केंद्र सरकार से फंड की मांग की है। क्योंकि हमारा खजाना खाली हो गया है संकट के समय में केंद्र को हमारी मदद करनीं चाहिए। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सीसोदिया ने कहा की, मैंने केंद्रीय वित्त मंत्री को चिट्ठी लिखकर दिल्ली के लिए 5 हज़ार करोड़ रुपए की राशि की माँग की है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है की कोरोना वायरस संकट से निपटनें के लिए हर व्यवस्था केंद्र सरकार ने की तो दिल्ली का खजाना कैसे खाली हो गया। आखिर मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने लॉकडाउन के दौरान दिल्लीवालों के लिए ऐसा क्या कर दिया की पूरा खजाना ही खाली हो गया और किसी राज्य ने तो हजारों करोड़ की मांग नहीं की केंद्र सरकार से।

गौरतलब है की सभी राज्यों को पीपीई किट केंद्र सरकार ने दी, जिसमें दिल्ली भी शामिल है। राशन केंद्र सरकार ने मुहैया करवाया, गरीब मजदूरों के खाते में पैसा केंद्र सरकार ने डाला। दिल्ली से पलायन कर रहे मजदूरों के लिए बसें उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने चलवाई। देशभर के मजदूरों की सुविधा के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें केंद्र सरकार ने चलाई। इसके अलावा दिल्ली सरकार के अधीन आने वाली DTC बसें फ्री में चली ही नहीं। और केजरीवाल सरकार ने कर्मचारियों को सैलरी दी नहीं तो दिल्ली सरकार का खजाना कैसे खाली हो गया। वैसे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को इन सब सवालों का जवाब देना चाहिए।

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने जब ट्वीट करके कहा की, हमनें वित्त मंत्री को चिट्ठी लिखकर दिल्ली के लिए 5 हज़ार करोड़ रुपए की राशि की माँग की है तो लोग हैरान रह गए। लोगों की हैरानी का कारण यह है की रोजाना अख़बारों में फ्रंट पेज पर विज्ञापन दिल्ली सरकार के आ रहे हैं, फोटो केजरीवाल की छप रही है। मीडिया चैनलों में करोड़ों के विज्ञापन दिल्ली सरकार के चल रहे हैं। जब विज्ञापन के पैसे दिल्ली सरकार के पास हैं तो कर्मचारियों की सैलरी देनें के लिए केंद्र सरकार से मदद क्यों?

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