दिल्ली में हर 25 मिनट में कोरोना से एक मौत, बहुत भयावह हैं हालात?

नई दिल्ली, 12 जून: कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है, सबसे ज्यादा महाराष्ट्र, तमिलनाडु और दिल्ली कोरोना से प्रभावित हैं, दिल्ली में रोजाना 1 हजार से ज्यादा कोरोना वायरस के मामलें आ रहे हैं। ये दर्शाता है की दिल्ली में स्वास्थ्य सेवाओं के हालात ठीक नहीं है।

दिल्ली में गुरुवार को 65 लोगों की कोरोना वायरस से मौत हो गई, यानि हर 25 मिनट में एक व्यक्ति की जान गई, जी न्यूज़ के मुताबिक़, दिल्ली में कोरोना से मरनेँ वाले लोगों के अंतिम संस्कार करनें के लिए 4 शमशान घाट और 2 कब्रिस्तान बढ़ाये गए।

दिल्ली में ये हालात तब हैं जब केजरीवाल सरकार पर कोरोना से मौत के आंकड़े छुपानें के आरोप लग रहे हैं, भाजपा और कांग्रेस का कहना है की, दिल्ली में कोरोना से ज्यादा मौतें हो रही हैं, लेकिन केजरीवाल सरकार छुपा रही है, अपनीं नाकामयाबी छुपानें के लिए मीडिया के सामनें सही आंकड़े नहीं रख रही है।

दिल्ली के ये हालात देख कर लग रहा है की, दिल्ली अब कोरोना के भंवर में जाती दिख रही है, मुख्यमंत्री केजरीवाल इसे रोकनें में असफल साबित हो रहे हैं, दिल्ली से अब बहुत डराने वाले और भयावह आंकड़े आ रहे हैं, यहीं नहीं दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में शवों के बीच में कोरोना मरीजों का ईलाज हो रहा है, शव इधर-उधर बिखरे हैं पूरे अस्पताल में।

दिल्ली की लचर स्वास्थ्य सेवाओं को देखकर सुप्रीम कोर्ट ने भी केजरीवाल सरकार को फटकार लगाई है, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में कोरोना मरीजों की मौत के बाद उनके रखरखाव को लेकर दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर तल्ख़ टिप्पणी की, SC ने कहा की, गृहमंत्रालय की गाइडलाइन का अनुपालन नहीं हो रहा है, अस्पतालों का बुराहाल है, अस्पताल में डेड बॉडी का सहित तरह से रखरखाव नहीं किया जा रहा है। कोरोना टेस्टिंग कम कर दी गई है।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा की, कोरोना मरीजों की मौत के बाद उनके परिजनों को भी इसकी सूचना नहीं दी जा रही है। ऐसे ऐसे कई मामलें संज्ञान में आये हैं की परिजन अपनों की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं पाए, क्योंकि सरकार ने उन्हें सूचना देनें की जहमत ही नहीं उठाई। सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों में दिल्ली सरकार को जवाब दाखिल करनें का आदेश दिया है।

loading...