BJP और RSS कान खोलकर सुन लें आरक्षण हमारा मौलिक अधिकार है, कोई खैरात नहीं: फुरकान अंसारी कांग्रेस

नई दिल्ली, 11 जून: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को आरक्षण पर बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा की, आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है। आरक्षण सम्बंधित एक याचिका पर सुनवाई करनें से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी का दलित नेता विरोध कर रहे हैं, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ कांग्रेस नेता फुरकान अंसारी भी आ गए हैं, अंसारी ने कहा की, भाजपा और आरएसएस कान खोलकर सुन लें, आरक्षण हमारा मौलिक अधिकार है, कोई खैरात नहीं।

झारखण्ड प्रदेश कांग्रेस के सीनियर नेता और गोड्डा से सांसद रह चुके फुरकान अंसारी ने अपनें ट्वीट में लिखा, जब तक जाति है तब तक #आरक्षण जारी रहेगा। RSS और भारतीय जनता पार्टी के सभी नेता कान खोलकर सुन लें, आरक्षण हमारा मौलिक अधिकार है, कोई खैरात नहीं।

बता दें की, तमिलनाडु की राजनितिक पार्टियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके NEET में 50 फीसदी ओबीसी आरक्षण माँगा था परन्तु सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करनें से इनकार कर दिया। याचिका दायर करने वालों में डीएमके, एआईडीएमके, सीपीएम, तमिलनाडु सरकार और तमिलनाडु की कई अन्य पार्टियां शामिल थीं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा की, तमिलनाडु की सभी राजनीतिक पार्टियां राज्य के ओबीसी के कल्याण के एक साथ मिलकर आगे आई हैं, यह असामान्य बात है लेकिन आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है कि उसके लिए अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल हो। आप चाहें तो अपनीं बात हाईकोर्ट में रख सकते हैं।

भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर रावण ने सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी का विरोध करते हुए संविधान विरोधी बताया है, वहीँ कांग्रेस नेता उदित राज ने भी इसका विरोध किया है।

चंद्रशेखर रावण ने ट्वीट कर कहा की, NEET ओबीसी रिज़र्वेशन मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला संविधान विरोधी है। केंद्र सरकार और मुंह में दही जमाए बैठे बहुजन सांसदों को आगाह करता हूँ कि वह सुनिश्चित करें कि आरक्षण पर कोई आंच नहीं आएगा। वर्ना 25 जून के बाद ASP व भीम आर्मी संसद का घेराव करेगी।

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