चीनी जनता ने जिनपिंग के खिलाफ खोला मोर्चा, पूछा- गलवान घाटी में कितनें चीनी सैनिक मरे?

15 जून को भारत और चीन सेना के बीच लद्दाख की गलवान घाटी में झड़प हो गई, इस हिंसक झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए। वहीँ 43 चीनी सैनिकों के भी मारे जानें की जानकारी सामनें आई। हालाँकि चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने आधिकारिक तौर पर कोई भी संख्या नहीं बताया।

चूँकि भारत एक लोकतान्त्रिक देश है, इसलिए गलवान में हुई झड़प के कुछ देर बाद क्या-क्या हुआ सार्वजानिक तौर पर पूरा ब्यौरा दे दिया, भारतीय सेना के मुताबिक़, चीनी सेना के साथ झड़प में कर्नल संतोष बाबू समेत 3 जवान मौके पर शहीद हो गए जबकि 17 सैनिक ईलाज के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए। वहीँ चीन ने अभी तक कुछ भी जानकारी नहीं दी की उसेक कितनें सैनिक मरे, कितनें घायल हैं। क्योंकि चीन में लोकतंत्र का महत्व नहीं है। मीडिया सरकार की गुलाम है।

आजतक के मुताबिक़, जानकारी छुपाने को लेकर चीनी जनता अब सोशल मीडिया पर चीन सरकार, राष्ट्रपति सी जिनपिंग और चीनी मीडिया के खिलाफ मोर्चा खोल चुकी है, चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का विश्लेषण दिखाता है कि कैसे वहां के नागरिक बीजिंग के सख्त ऑनलाइन रेगुलेशन्स पर गुस्सा जता रहे हैं। चीन की जनता जाननी चाहती है कि आखिर गलवान घाटी में पीएलए यानी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के कितनें जवान मरे, कितने घायल हुए. लेकिन चीनी सरकार बेइज्जती के डर के मारें कुछ भी जानकारी नहीं दे रही है।

हालाँकि चीनी जनता सोशल मीडिया पर चीनी सरकार के खिलाफ आक्रोश व्यक्त कर रही है लेकिन शब्दों का चयन बहुत सोंच-समझकर कर रही है। जिससे बाद में उन्हेंकोई नतीजे न भुगतने पड़ें। बता दें कि Weibo चीन का अपना ट्विटर हैं. इस माइक्रो ब्लॉगिंग साइट पर चल रहे संवाद का विश्लेषण बताता है कि चीनी नागरिक अधिकतर भारतीय तस्वीरों, न्यूज आर्टिकल्स और गलवान घाटी में टकराव से जुड़े वीडियो शेयर कर रहे हैं।

आजतक ने कुछ चीनी जनता के ट्वीट्स को ट्रांसलेट किया है, जिसके मुताबिक, चीन की जनता का कहना है कि PLA के हताहत सैनिकों को लेकर चीनी नेटीजन्स पारदर्शिता की मांग करते हैं. वो भारत की इस बात के लिए सराहना करना चाहेंगे कि उसने अपने नुकसान को लेकर अपनी जनता को बिना कोई देर किए अवगत कराया। लेकिन हमें कुछ जानकारी हमारी सरकार नहीं दे रही है।