“गर्भावस्था” जमानत मिलने की गारंटी नहीं, सफूरा जरगर प्रेग्नेंट हैं, मासूम नहीं: कपिल मिश्रा

नई दिल्ली, 6 जून: दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी की छात्रा सफूरा जरगर की एक बार फिर से जमानत याचिका ख़ारिज हो गई है। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने सफूरा जरगर की जमानत याचिका को खारिज किया। बेल अर्जी खारिज होनें के बाद एक्टर अली फैजल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग कर ट्वीट किया है की, प्रेग्नेंट सफूरा जरगर को रिहा कर दें, मांं सुरक्षित महसूस करेंगी।

सफूरा जरगर की जमानत याचिका खारिज होनें के बाद भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने ट्वीट कर कहा है की, “गर्भावस्था” जमानत मिलने की गारंटी नहीं है. बाबा साहेब को संविधान मानना ही पड़ेगा।

कपिल मिश्रा ने अपनें ट्वीट में लिखा, सफूरा जरगर Pregnant ( गर्भवती ) हैं, Innocent ( मासूम ) नहीं, “गर्भावस्था” जमानत मिलने की गारंटी नहीं ये बाबा साहेब का संविधान हैं, मानना पड़ेगा।

बता दें कि, सफूरा जरगर को दिल्ली पुलिस ने 10 अप्रैल को गैरक़ानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम ( UAPA) के तहत गिरफ्तार किया था। सफूरा जरगर पर इसी साल फ़रवरी में उत्तरी-पूर्वी दिल्ली में हुई साम्प्रदायिक हिंसा में शामिल होनें का और साजिश रचनें का आरोप है। सफूरा जरगर 3 महीनें की प्रेग्नेंट भी है, सफूरा जरगर ने स्वास्थ्य का हवाला देकर पटियाला हाउस कोर्ट में याचिका दायर कर जमानत की गुहार लगाई थी, लगभग 4 घंटे चली बहस के बाद न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने जमानत देने से इनकार कर दिया।

पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त स्तर न्यायाधीश धर्मेंद्र राणा ने सफूरा जरगर की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा की, आरोपी (सफूरा ) प्रत्यक्ष रूप से हिंसा न की हो लेकिन वह UAPAके तहत अपनें दायित्व से बच नहीं सकती।