संबित पात्रा के जाल में फंस गए कांग्रेसी, खुद ही कहनें लगे 45 साल पहले हमने तानाशाही की थी

25 जून 1975 भारत के इतिहास में सबसे काले अक्षरों में लिखा जायेगा, 45 साल पहले आज ही के दिन कांग्रेस नेत्री और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी ने देश को आपातकाल की आग में झोंक दिया था। आज के लोग कल्पना भी नहीं कर सकते उस वक्त आपातकाल में कैसा ख़ौफ़ था। जी हाँ! इंदिरा गांधी ने ये सब काला कारनामा अपनी कुर्सी बचानें के लिए किया था। इस कड़वे सच को अब कॉंग्रेसियों ने भी स्वीकार कर लिया है।

कांग्रेसियों के मुंह से ये सच सुनने के लिए भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने ऐसा जाल बिछाया कि कांग्रेसी उसमें फंस गए और खुद ही कबूलनें लगे कि हाँ! 45 साल पहले हमने तानाशाही की थी।

दरअसल संबित ने आपातकाल को लेकर एक ट्वीट किया, ट्वीट में पात्रा ने लिखा, 41 साल हो गए..भूलना मत क्या किया था इस “राजवंश” ने, संबित के इस ट्वीट को कांग्रेसी समझ नहीं पाए और कहनें लगे 41 साल नहीं बल्कि 45 साल हो गए। अर्थात कांग्रेसियों ने स्वीकार किया कि 41 साल पहले नहीं बल्कि आपातकाल 45 साल पहले लगा था जो देश पर एक कलंक है।

संबित पात्रा के ट्वीट को रीट्वीट करते हुए एक कांग्रेसी ने लिखा- अनपढ़ संबित पात्रा यार कितनी बार बोला है कि अपना इलाज करवाओ 41 नहीं 45 होता है। थोड़ा पढ़-लिख लेते यार! अब इसमें भी कांग्रेस का कसूर निकाल दो।

इसके बाद संबित पात्रा ने ट्वीट में लिखा, हा हा …देखो आज कांग्रेसी, आपातकाल का नाम सुनते ही जिनके मुँह में दही जम जाती थी ..आज खुद मान रहें है 41 साल नहीं बल्कि 45 साल पहले हमने तानाशाही की थी…वाह, दरअसल संबिता पात्रा ने कोंग्रेसियों को कन्फ्यूज करनें के लिए 45 की जगह 41 लिखा था और कांग्रेसी कन्फ्यूज हो भी गए।

बता दें कि – आज से 45 साल पहले इंदिरा गांधी द्वारा लगाया गया आपातकाल 25 जून, 1975 से 21 मार्च, 1977 तक यानि 21 महीनों तक देश पर थोपा गया। अगली सुबह पूरे देश ने रेडियो पर इंदिरा की आवाज में संदेश सुना था, भाइयो और बहनो, राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद जी ने आपातकाल की घोषणा की है।

आपातकाल के दौरान अख़बारों की आज़ादी छीन ली गई, ज़बरन नसबंदियाँ हुईं, थानों में ज़ुल्म हुए, आज के लोग कल्पना भी नहीं कर सकते इमर्जेन्सी में कैसा ख़ौफ़ था, उस वक्त न प्राइवेट टीवी था, न सोशल मीडिया, लाखों लोग जेल में थे. अख़बारों पर सेंसर, अदालतों के गले में फंदा, पुलिस के ज़ुल्म, न बोलने की आज़ादी, न कोई अधिकार, 25 जून की रात से ही देश में विपक्ष के नेताओं की गिरफ्तारियां शुरू हो गई थी, जयप्रकाश नारायण, लालकृष्ण आडवाणी, अटल बिहारी वाजपेयी, जॉर्ज फर्नाडीस आदि बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया गया था। जेलों में जगह नहीं बची थी। आपातकाल के बाद प्रशासन और पुलिस के द्वारा भारी टॉर्चर की कहानियां सामने आई थीं। भारत के इतिहास पर आपातकाल एक धब्बा है, इसकी जिम्मेदार इंदिरा गांधी थी।

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