दक्षिण भारत और महाराष्ट्र में काम करने वाले बिहार के 28 लाख मजदूरों ने घर वापसी के लिए किया आवदेन

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए देशभर में लॉकडाउन को 17 मई तक बढ़ा दिया है। हालाँकि देश के अलग-अलग राज्यों में फंसे मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने के लिए गृह मंत्रालय ने स्पेशल ट्रेन चलाने का फैसला लिया है।

इस फैसले के बाद घर वापसी करने के लिए बिहार के 28 लाख मजदूरों ने आवेदन किया है। ये सभी मजदूर महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में फंसे हुए हैं। इससे साफ़ अंदाजा लगाया जा सकता है की बिहार कितना पिछड़ा राज्य है।

सरकारें बदल गई। विधायक बदल गए लेकिन बिहार के मजदूरों की किस्मत नहीं बदली। मजदूरों को अपने जीवन-यापन के लिए अन्य राज्यों में जाना पड़ता है। जोकि बिहार सरकार के लिए काफी शर्म की बात है। एक आंकलन के मुताबिक छात्रों और मजदूर सहित अन्य लोगों को मिलकर कुल 35 से 40 लाख लोगों को बिहार वापस लाना होगा।

बता दें कि – देश में कोरोना वायरस के आंकड़ों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है. कोविड-19 पॉजिटिव केस अब बढ़कर 35,000 के पार चले गए हैं।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 1 मई शाम 5 बजे तक देश में कोविड-19 के कुल मामले बढ़कर 35,365 हो गए हैं, वहीं इससे मरने वालों की संख्या 1,152 हो गई है. अब तक इस बीमारी से 9,065 मरीज ठीक हो चुके हैं।