सोनिया ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को इसलिए नहीं बनाया MP का CM, कहीं बेटे से आगे ना निकल जाए

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नई दिल्ली: आपने देखा होगा कि 18 महीनें पहले कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को चेहरा बनाकर मध्य प्रदेश में चुनाव लड़ा था, मध्य प्रदेश की जनता ने सोचा कि चुनाव जीतने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया को ही मुख्यमंत्री बनाया जाएगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया के बजाय कमलनाथ को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बना दिया गया, उसके बाद कयास लगाए जाने लगे कि हो सकता है ज्योतिरादित्य सिंधिया को उप मुख्यमंत्री बनाया जाय लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ। ज्योतिरादित्य सिंधिया को उनके हाल पर छोड़ दिया गया और कर्जमाफी पर किसानों से वादाखिलाफी करके उन्हें लोकसभा चुनाव भी हरवा दिया गया। एक तरह से सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया का पूरा कैरियर ही चौपट कर दिया और उन्हें घर बिठा दिया।

सूत्रों से पता चला है कि सोनिया गाँधी ने काबिल और होनहार ज्योतिरादित्य सिंधिया को इसलिए मुख्यमंत्री नहीं बनाया क्योंकि आगे चलकर वह राहुल गाँधी के रास्ते का काँटा बन सकते थे। सोनिया गाँधी प्रधानमंत्री पद की कुर्सी अपने बेटे के लिए ही रिज़र्व रखना चाहती हैं इसलिए कांग्रेस में युवा, काबिल और होनहार लोगों को आगे बढ़ने ही नहीं दिया जाता, यही काम राजस्थान में सचिन पायलट के साथ किया गया, उन्हें भी उप मुख्यमंत्री का झुनझुना पहना दिया गया, अब उनकी रोजाना मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से खटकती रहती है। भाजपा के लोग कह रहे हैं कि सचिन पायलट भी कांग्रेस छोड़कर जल्द ही भाजपा में आ जाएंगे।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस में युवा और प्रभावशाली चेहरा थे जिनकी प्रतिभा को भाजपा नेता भली भाँती समझते थे लेकिन कांग्रेस पार्टी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की क़द्र नहीं की, जब ज्योतिरादित्य सिंधिया सांसद थे तो राहुल गाँधी को वही बताते थे कि किस मुद्दे पर क्या बोलना है, लेकिन जब मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर फैसले की बारी आयी तो राहुल गाँधी को जरा सा भी ज्योतिरादित्य सिंधिया का ख्याल नहीं आया। इसी वजह से नाराज होकर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा का दामन थाम लिया।

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