पायल रोहतगी ने खोला आरक्षण के खिलाफ मोर्चा, कहा, बंद करो ये आरक्षण का ड्रामा? Only MERIT..!

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नई दिल्ली, 16 फ़रवरी: बॉलीवुड अभिनेत्री पायल रोहतगी ने अब आरक्षण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पायल ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक बच्चे का वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, अब आरक्षण बंद होना चाहिए। बहुत हो गया 70 साल।

पायल रोहतगी ने कहा की, भारत में आरक्षण बंद होना चाहिए? उन्होंने कहा की, बहुत हो गया आरक्षण पर 70 साल से ड्रामा, अब नहीं सहा जाता! क्योंकि भारत में सबका सम्मान है तो जातिगत आरक्षण क्यों? इसके बाद पायल रोहतगी ने कहा की, आरक्षण पूरी तरह समाप्त कर देना चाहिए, सिर्फ मेरिट सिस्टम चलना चाहिए अर्थात जो जितनी मेहनत करेगा उसको उतना ही फल मिलेगा। चाहे सवर्ण हो या दलित।

पायल रोहतगी ने ट्विटर पर जो वीडियो शेयर किया है, उसमें एक छोटा बच्चा दिखाई दे रहा है, जिसकी अभी खेलने, खाने और पढ़ने की उम्र है? लेकिन वो ट्रेन में अखबार बेंच रहा रहा है। वैसे कोई भी बच्चा इस उम्र में शौक से तो अखबार बेंचना/नौकरी करना नहीं चाहेगा। जरूर इस बच्चे की मज़बूरी होगी। आइये जानते हैं। क्या है इस बच्चे की मज़बूरी।

वीडियो में दिखने वाला बच्चे का नाम नीलकंठ दूबे है, जो मध्यप्रदेश का रहने वाला है, होश संभालते ही पिता का साथ सर से ( देहांत ) उठ गया। परिवार में कोई कमाने वाला नहीं है। इसलिए नीलकंठ परिवार का पेट पालने के लिए अख़बार बेंचते हैं जो पैसा मिलता है उसी पैसे से पढाई भी करते हैं और स्कूल में टॉप भी करते हैं, फिर भी कोई मदद नहीं करता है। क्योंकि? नीलकंठ का गुनाह सिर्फ इतना है की वो सवर्ण यानी उच्च जाति से तालुक रखते हैं।

नीलकंठ दूबे ने बताया की, मैं मज़बूरी में अखबार बेंचता हूँ, जब मैं छोटा था तो मेरे पिताजी का देहांत हो गया था, घर में माँ हैं और मेरा भाई, मेरे भाई प्रशांत दूबे ने अभी अपने स्कुल में सबसे ज्यादा नंबर हासिल करते हुए 96% हासिल किये थे। एक और भाई है, जिसका नाम है आशुतोष दूबे उसका भी 83% रिजल्ट आया है। नीलकंठ भी पढाई करते हैं।

नीलकंठ ने कहा की, अख़बार बेंचकर मैनें 5 हजार कमा लिए हैं, इसी से फीस भरेंगें, नीलकंठ ने बताया की, कोई स्कॉलरशिप भी नहीं देता। क्योंकि हम सामान्य वर्ग में आते हैं। अख़बार बेंचने वाले बच्चे ने बताया की, हम फुल कॉन्फिडेंस से पढाई करते हैं। हमनें 5 वीं में 93 फीसदी रिजल्ट लाकर स्कूल का गौरव बढ़ाया है। नीलकंठ दूबे रीवा से सतना तक ट्रैन के जरिये अख़बार बेंचते हैं।

नीलकंठ का ये वीडियो देखने के बाद ही पायल रोहतगी ने आरक्षण के खिलाफ मोर्चा खोला है। क्योंकि नीलकंठ दूबे जैसे गरीब बच्चों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलता है। क्योंकि वो सामान्य जाती के हैं। जबकि दलित का बच्चा चाहे करोड़पति के घर का हो लेकिन उसको आरक्षण मिलता है।