26/11: तुकाराम ओंबले ने बहादुरी न दिखाई होती तो दुनिया चीख-चीखकर चिल्ला रही होती हिन्दू आतंकवाद

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मुंबई, 19 फ़रवरी: 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए भयावह आतंकी हमलें को लगभग 12 साल हो चुके हैं, लेकिन इसी बीच मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त राकेश मारिया ने दावा किया है कि पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने 26/11 के मुंबई आतंकी हमले को “हिंदू आतंकवाद” के रूप में पेश करने तथा पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद अजमल कसाब को बेंगलुरु के समीर चौधरी के रूप में मारे जाने की योजना बनाई थी।

मारिया ने सोमवार ( 17 फ़रवरी 2019 ) को जारी अपनी पुस्तक ‘लेट मी से इट नाउ’ में 26/11 के मुंबई हमले में उनके द्वारा की गई जांच का जिक्र किया गया है। उस हमले की योजना लश्कर ने बनाई थी और उसमें पाकिस्तान का हाथ भी होने का पता चला था। मारिया ने दावा किया है की आईएसआई ( पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ) और लश्कर जेल में ही कसाब को खत्म करने का प्रयास कर रहे थे, क्योंकि वह हमले की कड़ी उन समूहों से जोड़ने वाले प्रमुख सबूत था। मुंबई आतंकी हमले को “हिंदू आतंकवाद” के रूप में पेश करने की लश्कर की योजना का ब्यौरा देते हुए मारिया ने लिखा, “यदि सब कुछ योजना के अनुसार होता, तो कसाब चौधरी के रूप में मर जाता और मीडिया हमले के लिए ‘हिंदू आतंकवादियों’ को दोषी ठहराती। और पूरी दुनिया मुंबई हमलें को हिन्दू आतंकवाद के रूप में देखती।

परन्तु अब देशवासियों को खासकर हिन्दुओं शहीद तुकाराम ओंबले का शुक्रिया अदा करना चाहिए। जिन्होनें वीरगति को प्राप्त होकर ( जान गंवाकर ) आतंकी अजमल कसाब को जिन्दा पकड़ा था। जी हाँ? तुकाराम के कारण हिन्दुओं के माथे पर आतंकवाद का ठप्पा लगने से बच गया। कसाब को जिंदा पकड़ने के लिए मुंबई पुलिस के एएसआई शहीद तुकाराम ओंबले ने अपनी वीरता की ऐसी इबारत लिखी जिसे आनेवाली सदियां याद रखेंगी।

बता दें तुकाराम ओंबले ने सफेद स्कोडा लेकर भागे आतंकी अजमल कसाब और इस्माइल की कार को गिरगांव चौपाटी पर रोका था। इसी दौरान फायरिंग में इस्माइल की मौत हो गई जबकि अजमल कसाब को एके-47 तुकाराम ओंबले ने पकड़ ली थी। कसाब को भी जकड़ा था, लेकिन इसी दौरान फायरिंग में तुकाराम ओंबले को कई गोलियां लगी। इसके बावजूद उन्होंने कसाब को नहीं छोड़ा। तुकाराम की बहादुरी से अन्य पुलिसकर्मियों ने अजमल कसाब को जिंदा पकड़ लिया। इसके बाद गंभीर रूप से घायल तुकाराम ओंबले को अस्पताल में भर्ती कराया गया जहाँ वो वीरगति को प्राप्त हुए?

मुंबई आतंकी हमलें की जांच करने वाले तत्कालीन पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया ने दावा किया है की, आतंकवादी संगठन ने आतंकवादियों को भारतीय पते के साथ फर्जी पहचान पत्र भी दिए थे। आतंकी हमले के बाद जारी की गयी कसाब की एक तस्वीर के बारे में मारिया ने कहा, यह केंद्रीय एजेंसियों का काम था। सुरक्षा को देखते हुए मुंबई पुलिस ने पूरी कोशिश की कि मीडिया के सामने किसी विवरण का खुलासा नहीं हो।

तस्वीर में कसाब की दाहिनी कलाई पर लाल रंग का धागा बंधा हुआ था जिसे पवित्र हिंदू धागा माना जाता है। इस बात ने कई लोगों को यह भरोसा करने के लिए प्रेरित किया कि षडयंत्रकारियों ने 26/11 हमले को ‘हिंदू आतंकवाद’ के रूप में पेश करने का प्रयास किया था। मारिया ने अपनी किताब में लिखा, अगर कसाब तुरंत मारा जाता तो अखबारों में बड़ी-बड़ी सुर्खियां बनतीं जिनमें दावा किया जाता कि किस प्रकार हिंदू आतंकवादियों ने मुंबई पर हमला किया।शीर्ष टीवी पत्रकार उसके परिवार और पड़ोसियों से बातचीत करने के लिए बेंगलुरु पहुंच जाते। लेकिन अफसोस, ऐसा नहीं हो सका वह पाकिस्तान में फरीदकोट का अजमल आमिर कसाब था। उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई के कांस्टेबल शहीद तुकाराम ओम्बले द्वारा कसाब को जिंदा पकड़ लेने से वह योजना नाकाम हो गयी।

बता दें की समुद्र के रास्ते पाकिस्तान से आये 10 आतंकवादियों ने मुंबई में 26 नवंबर 2008 को कई जगहों पर हमले कर 166 लोग की हत्या दी थी. इस हमलें में एकमात्र आतंकी अजमल कसाब जिन्दा पकड़ा गया था. जिसे 21 नवंबर 2012 को पुणे की यरवडा जेल में फांसी पर लटका दिया गया था.