पढ़ें, PM मोदी दिल्ली में केजरीवाल की तरह क्यों नहीं कर रहे मुफ्तखोरी के वादे

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नई दिल्ली: दिल्ली में आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच सीधी टक्कर है, 8 फ़रवरी को चुनाव होने वाले हैं और 11 फ़रवरी को नतीजे आएंगे। अरविन्द केजरीवाल मुफ्तखोरी के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे हैं तो भाजपा ने मुफ्तखोरी के वादे नहीं किये हैं जबकि अगर भाजपा चाहे तो दिल्ली वालों को 5 साल मुफ्त में बैठाकर खिला सकती है और बिजली पानी और दवाइयाँ भी मुफ्त में दे सकती है क्योंकि केंद्र में मोदी सरकार है और देश का खजाना उनके पास है।

अब हम आपको बताने जा रहे हैं कि केजरीवाल की तरह भाजपा ने मुफ्तखोरी के वादे क्यों नहीं किये, आप जानते ही हैं कि केजरीवाल दिल्ली के खजाने से ही निकालकर जनता को बिजली पानी और दवाइयाँ बाँट रहे हैं, जब खजाना खाली हो जाएगा तो जनता पर टैक्स का भार लादकर उनसे ही इसकी वसूली की जाएगी लेकिन जनता को अभी इसका अहसास नहीं है। उदाहरण के लिए जब कोई बैंक से लोन लेकर उसी पैसे से बैठकर खाता है तो एक ना एक दिन लोन जमा भी करना होता है, उसी तरह से केजरीवाल भी दिल्ली वालों का ही पैसा उनपर बाँट रहे हैं लेकिन इसकी भरपाई दिल्ली की जनता को ही करनी पड़ेगी।

अगर भाजपा चाहे तो वह भी मुफ्तखोरी के वादे करके दिल्ली में सरकार बना सकती है लेकिन अगर वह दिल्ली में सब कुछ मुफ्त में बांटेंगे तो देश के अन्य राज्यों में जहाँ उनकी सरकार है, वहां की जनता भी भाजपा से यही उम्मीद करेगी, और अगर भाजपा ने ऐसा किया तो देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो जाएगी। इसीलिए भाजपा किसी भी राज्य में मुफ्तखोरी के वादे नहीं करती और जनता की समझदारी पर भरोसा करती है।

दिल्ली में भी भाजपा को जनता की समझदारी पर भरोसा है। एक तरफ वह लोग हैं जो बैठकर मुफ्त में खाना चाहते हैं तो दूसरी तरफ वह लोग हैं जो अपनी मेहनत से पैसे कमाकर खाने में यकीन करते हैं। अगर दिल्ली में मुफ्तखोरों की संख्या अधिक हुई तो केजरीवाल की फिर से सरकार बनेगी और अगर मुफ्तखोरों की संख्या कम हुई तो भाजपा की सरकार बनेगी। अगर भाजपा की सरकार नहीं बनी तो उन्हें कोई प्रॉब्लम नहीं होगी, लेकिन अगर केजरीवाल की सरकार बनी तो जल्द ही उनकी पोल खुल जाएगी क्योंकि मुफ्त में बांटकर जब दिल्ली का खजाना खाली हो जाएगी और दिल्ली का विकास रुक जाएगा तो दिल्ली वालों को अहसास हो जाएगा कि उन्हें तो उनके ही जेब से पैसा निकालकर मुफ्त में बांटा जा रहा था, इसके अलावा जब खजाना भरने के लिए दिल्ली वालों पर टैक्स का बोझ लादा जाएगा तो भी दिल्ली वालों को अपनी मुफ्तखोरी वाली गलती का अहसास हो जाएगा।

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