अब सुप्रीम कोर्ट में भी गूंजेगा 1947 में धर्म के आधार पर मुसलमानों ने बनाया अपने लिए अलग देश

LIKE फेसबुक पेज

नई दिल्ली, 22 जनवरी: नागरिकता संसोधन कानून ( CAA ) पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी, सुप्रीम कोर्ट कुल 104 याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। जिसमें CAA विरोधियों की भी याचिका है और CAA समर्थकों की भी याचिका है।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान CAA समर्थित याचिका वाले वकील कहेंगें की धर्म के आधार पर 1947 में देश का बंटवारा हुआ। मुस्लिमों ने अपना अलग देश पाकिस्तान ले लिया। बंटवारे के दौरान समझौता हुआ था की मुस्लिम पाकिस्तान में रहेंगे और हिन्दू हिंदुस्तान में ही रहेंगें। बंटवारे के समय यह भी समझौता हुआ था की पाकिस्तान में छूटे हुए हिन्दू अगर बाद में भारत आना चाहे तो उन्हें नागरिकता दी जायेगी और हिंदुस्तान में रह रहे मुसलमान अगर पाकिस्तान जाना चाहेंगें तो उन्हें पकिस्तान की नागरिकता मिलेगी।

मोदी सरकार ने 1947 के समझौते को आधार मानकर नागरिकता संसोधन कानून ( CAA ) लागू किया है, इसके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के सिख, हिन्दू, बौद्ध एवं अन्य अल्पसंख्यकों को भारत में नागरिकता देने का प्रावधान है।

भारत में रह रहे मुस्लिम मोदी सरकार के कानून का विरोध कर रहे हैं ये लोग चाहते हैं की तीनों देशों के मुस्लिमों को भी भारत की नागरिकता दी जाय, लेकिन सवाल यह है की जब तीनों देशों के मुस्लिम नागरिकों को भारत की नागरिकता दी जायेगी तो 1947 में धर्म के आधार में भारत का बंटवारा क्यों करवाया गया। सुप्रीम कोर्ट में यह सब तर्क रखे जायेंगें।