शाहीन बाग़ में आंदोलन नहीं हो रहा है बल्कि ये हिन्दुओं के खिलाफ जिहाद है: वकील प्रशांत पटेल

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नई दिल्ली, 18 जनवरी: दिल्ली के शाहीन बग में पिछले एक महीनें से नागरिकता संसोधन कानून ( CAA ) के विरोध में धरना प्रदर्शन हो रहा है। परन्तु सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रशांत पटेल ने इसे धरना ( आंदोलन ) नहीं बल्कि हिन्दुओं के खिलाफ जिहाद बताया है।

दरअसल शाहीन बाग़ में 19 जनवरी 2020 को शाम सात बजे जश्न-ए-शाहीन कार्यक्रम का आयोजन किया गया है, इस दौरान यहाँ मौजूद लोग जमकर जश्न मनायेंगें। जश्न-ए-शाहीन का मुख्य उद्देश्य है की कश्मीरी पंडितों के जख्म को कुरेदकर उसपर नामक रगड़ना। जी हाँ। क्योंकि आज से ठीक 30 पहले 19 जनवरी 1990 को कश्मीरी पंडितों का नरसंहार हुआ था।

शाहीन बाग़ में आगामी जश्न-ए-शाहीन कार्यक्रम को लेकर कहा की, 19 जनवरी के दिन 1990 में कश्मीर से हिंदुओं को निकाला गया, उनका नरसंहार किया गया व महिलाओं का रेप किया गया। अब शाहीन बाग में 19 जनवरी को उसी नरसंहार की खुशी में ‘जश्न-ए-शाहीन’ मनाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के वकील ने का, CAA के नाम पर यह फंडेड आंदोलन वास्तव में हिंदुओं के विरुद्ध जिहाद है।

मालूम हो की की 19 जनवरी 1990 की रात में मस्जिदों से ऐलान हुआ की कश्मीरी पंडित कश्मीर छोड़कर भाग जाएँ। इसके बाद मुस्लिम लोग लगातार कश्मीरी पंडितों की हत्यायें औऱ रेप करने लगे। कहते थे कि पंडितो, यहां से भाग जाओ, पर अपनी औरतों को यहीं छोड़ जाओ। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 60 हजार परिवार कश्मीर छोड़कर भाग गये। उन्हें आस-पास के राज्यों में जगह मिली।

19 जनवरी 1990 को सबसे ज्यादा लोगों ने कश्मीर छोड़ा था। उस दिन लगभग 4 लाख कश्मीरी पंडितों ने कश्मीर छोड़ा था। लोगों ने रोते विलखते कश्मीर छोड़ा। कई परिवारों की महिलाओं, बहन बेटियों के साथ बलात्कार तक कर दिया गया था। कश्मीरी पंडित 19 जनवरी को शायद ही आजीवन भूल सकें।