जिन्ना ने ले लिया जिहादियों का आजादी में योगदान का दाम, फिर भी अहसान जताते हैं भारतीय जिहादी

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नई दिल्ली: देश की आजादी में हिन्दुओं, मुस्लिम और अन्य समाज ने योगदान दिया था। कट्टरपंथी नेता जिन्ना ने 1947 में मुस्लिमों की आजादी में योगदान का दाम माँगा था, जिन्ना ने कहा था की देश को आजादी दिलाने में मुस्लिमों ने भी योगदान दिया है इसलिए हमें मुस्लिमों के लिए अलग देश चाहिए, जिन्ना की मांग पर मुस्लिमों के लिए पाकिस्तान बना दिया गया, बाद में पाकिस्तान के भी दो टुकड़े हुए और बांग्लादेश अलग देश बन गया, बंगलादेश भी इस्लामिक देश है।

कहने का मतलब ये है की जिन्ना ने 1947 में ही मुस्लिमों का आजादी दिलाने में योगदान का दाम ले लिया था, उसने देश को दो टुकड़ों में बाँट दिया था, मुस्लिमों के लिए पाकिस्तान अलग देश बन गया था लेकिन हिंदुस्तान के कुछ मुस्लिम पाकिस्तान नहीं गए और यहीं पर रह गए।

अब भारत में बसे कुछ मुस्लिम फिर से आजादी दिलाने में योगदान का दाम मांग रहे हैं, ओवैसी जैसे नेता कहते हैं कि इस देश को आजादी दिलाने में मुस्लिमों ने भी योगदान दिया है इसलिए यह देश हमारा है। यह देश सबका है लेकिन ओवैसी को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि मुस्लिमों का आजादी दिलाने में जो भी योगदान था उसका दाम उन्हें पाकिस्तान और बांग्लादेश के रूप में दिया जा चुका है।

हिंदुस्तान पर अपना हक़ जताने वाले मुस्लिमों से यह भी सवाल पूछा जाना चाहिए कि जब जिन्ना तुम लोगों के अहसान को बेच रहा था, मुस्लिमों के लिए अलग देश मांग रहा था तो तुम लोगों ने जिन्ना का विरोध क्यों नहीं किया। तुम लोगों को उसी वक्त बोलना था कि भारत के दो टुकड़े नहीं होंगे।

आज भारत के मुस्लिम नागरिकता संसोधन कानून का सिर्फ इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि ये चाहते हैं कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के मुस्लिम घुसपैठियों को भी भारत की नागरिकता दी जाए। जबकि भारत सरकार तीनों देशों के मुस्लिम घुसपैठियों को भारत की नागरिकता देने से मना कर रही है क्योंकि इनके लिए पहले ही पाकिस्तान, बांग्लादेश बनाए जा चुके हैं।