पढ़ें, रिश्वतखोर पुलिसवाले पैसे खाकर दिलवाते हैं बलात्कारियो को जमानत, जैसे उन्नाव केस में हुआ

LIKE फेसबुक पेज
unnav-rape-victim-death-because-corrupt-police-help-accused-bail

उन्नाव, 7 दिसंबर: उन्नाव रेप पीड़िता की दुखद मौत हो गयी। 6 दिसंबर 2019 को उसने सफदरजंग हॉस्पिटल में रात 11.40 बजे अंतिम सांस ली, उसकी अंतिम इक्षा आरोपियों के लिए सजाए मौत थी।

रेप पीड़िता की मौत के बाद अधिकतर लोग कह रहे हैं की अगर पुलिस ने आरोपियों की जमानत का कोर्ट में विरोध किया होता तो उन्हें जमानत नहीं मिलती, जब उन्हें जमानत नहीं मिलती तो वे जेल में ही रहते और इस तरह से रेप पीड़िता को जिन्दा ना जलाते। बेल बिलने के बाद आरोपियों का हौसला बढ़ गया और उन्होंने पीड़िता को मार डाला।

अब हम बताने जा रहे हैं की कुछ पुलिसकर्मी पैसे खाकर किस तरह से सिस्टम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। हर केस की जांच एक IO करता है जिसे इंवेस्टिगेटिंग अफसर कहा जाता है, IO अधिकतर ASI या SI होते हैं जो इंस्पेक्टर या SHO को रिपोर्ट करते हैं।

जब किसी आरोपी के खिलाफ केस दर्ज होता है तो भ्रष्ट पुलिस वालों को पैसे कमाने का मौका मिल जाता है, गैर जमानती मामलों में ही भ्रष्ट पुलिसकर्मियों को पैसे कमाने का अधिक मौका मिलता है क्योंकि ऐसे मामलों में कुछ दिन जेल की हवा खाना निश्चित है। केस दर्ज होने के बाद अगर पीड़ित पक्ष कमजोर होता है तो पुलिस वाले आरोपी पक्ष से पैसे खाकर गैर जमानती धारा हटा लेते हैं और आरोपी को थाने से ही जमानत मिल जाती है, कई बार गैर जमानती धाराओं में पुलिस पैसे खाकर कोर्ट में आरोपी की जमानत का विरोध नहीं करती इसी वजह से आरोपी को कोर्ट में आसानी से बेल में मिल जाती है।

उन्नाव केस में आरोपी जेल में थे लेकिन उन्हें बेल मिल गयी। अगर पुलिस ने आरोपियों की बेल का विरोध किया होता तो उन्हें बेल नहीं मिलती लेकिन हो सकता है की उन्हें आरोपी की तरफ से पैसे मिल गए हों और उन्होंने बेल का विरोध ना किया हो।

उच्च अधिकारीयों में भी बांटता है रिश्वतखोरी का पैसा

ऐसा नहीं है की धाराएं हटाने या जमानत दिलवाने में मिला पैसा अकेला IO ही खाता हो, यह पैसा SHO , ACP , DCP और कई बार कमिश्नर या SP तक भी पहुँचता है। रेप जैसे आरोपियों को जमानत दिलवाने में कई लाख रुपये मिलते हैं, गैर जमनारी धाराएं हटाने के लिए भी कई लाख रुपये मिलते हैं, पुलिस अधिकारी आरोपियों से कहते हैं कि अगर ये धारा लगी तो आप जेल जाएंगे, मंहगा वकील करके जमानत लेंगे और उसके बाद 10-20 साल तक कोर्ट कचहरी के चक्कर काटेंगे, कुल आपका 20 लाख खर्च होता, बेहतर यही है कि 10 लाख देकर धारा हटवा लो और अपना काम करो। पुलिस अधिकारीयों से ऐसी बातें सुनकर आरोपी पैसे देने के लिए विवश हो जाते हैं।

जब आरोपियों की तरफ से पैसा मिलता है तो भ्रष्ट पुलिसकर्मी और उच्च अधिकारी उसे आपस में बांटते हैं। ऐसा करके कई लाख रुपये एक ही महीनें में कमा लिए जाते हैं। कई बार तो भ्रष्ट पुलिस अधिकारी एक ही महीनें में 50-60 लाख रुपये कमा लेते हैं। दुर्भाग्य ये है कि ऐसे लोगों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होती, कई बार जब इनकी शिकायत की जाती है तो इन्हे सिर्फ कुछ दिनों के लिए सस्पेंड कर दिया जाता है।

खोखला है सिस्टम

पुलिस का सिस्टम की खोखला है, हर जिले में और हर राज्य में यही हालत है, यही वजह है कि अपराधियों को आसानी से बेल मिल जाती है और वे फिर से अपराध करते हैं, रेपिस्टों को भी बेल मिल जाती है और वे फिर से रेप करते हैं, कई बार मर्डर और मर्डर का प्रयास (302/307) जैसे मामलों में भी पुलिस पैसे खाकर केस को कमजोर करके आरोपियों को जमानत दिलवा देती है। कई पुलिसकर्मियों की तो यह मानसिकता होती है कि अगर अपराध नहीं होंगे, अगर रेप नहीं होंगे, अगर मर्डर नहीं होंगे तो हमारी जरूरत ही ख़त्म हो जाएगी इसलिए रेप, मर्डर और अपराध होने दो। कम से कम हमारी जरूरत तो बनी रहेगी। ऐसी मानसिकता में सुधार लाने की जरूरत है।