नागरिकता कानून के खिलाफ सड़क पर उतरा ओसामा बिन लादेन, लेकिन CAB और NRC का मतलब नहीं जानता

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नई दिल्ली, 18 दिसंबर: नागरिकता संसोधन कानून लागू होने के बाद राजधानी दिल्ली सहित देश के कई राज्यों में जबरदस्त हिंसक विरोध प्रदर्शन हो रहा है, ख़ास बात यह है की इस विरोध प्रदर्शन में अधिकतर वो मुस्लिम युवा भी हिस्सा ले रहे हैं जिन्हें नागरिकता संसोधन कानून Citizenship Amendment ACT ( CAA ) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर National register of Citizenship ( NRC ) के बारें में पता ही नहीं है, ऐसे कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।

दरअसल नागरिकता कानून के विरोध में रविवार ( 15 दिसंबर 2019 ) को दिल्ली के जामिया नगर में हिंसक प्रदर्शन होने के बाद मंगलवार ( 17 दिसंबर 2019 ) को दिल्ली के सीलमपुर और जाफराबाद में भी हिंसक प्रदर्शन हुआ, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और आम लोगों पर जमकर पत्थर बरसाए। इस दौरान एक रिपोर्टर की सीलमपुर के कुछ ऐसे प्रदर्शनकारियों से भेंट हो गई जिन्हें ये नहीं पता था की वो किसका विरोध कर रहे हैं और विरोध कर रहे हैं तो आम लोगों पर पत्थर क्यों बरसा रहे हैं।

सीलमपुर में जब पत्थरबाजी समाप्त हुई तो पत्थरबाजी वाली भीड़ में शामिल रहे कुछ युवा विरोध प्रदर्शन करने के बाद इधर-उधर सड़कों पर घूम रहे थे, इस दौरान एक रिपोर्टर ने सड़क पर घूम रहे युवाओं से जानना चाहा वो क्यों विरोध प्रदरसन कर रहे हैं तो, वो युवा नागरिका संसोधन कानून और एनआरसी के बारें में कुछ नहीं बता पाए, इसी में से एक प्रदर्शनकारी ने अपना नाम ओसामा बिन लादेन बताया।

ओसामा बिन लादेन से रिपोर्टर ने पूछा की आप भी प्रोटेस्ट में शामिल थे तो लादेन बोला, मैं कहीं जा रहा था और देखा की भीड़ इकठ्ठा थी तो मैं भी शामिल हो गया, फिर रिपोर्टर ने पूछा, अब तो आपको तो पता ही हो गया होगा की ये भीड़ यहाँ क्यों इकठ्ठा हुई है, इस सवाल का प्रदर्शनकारी ओसामा बिन लादेन के पास कोई जवाब नहीं था।

हालाँकि कुछ प्रदर्शनकारी मुस्लिम युवाओं ने बताया की हम एनआरसी और CAB के खिलाफ सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन इनको ये नहीं पता की एनआरसी और CAB क्या है, इससे हमें क्या लाभ और क्या हानि होगी। इसी भीड़ में शामिल एक मुस्लिम युवा बोला की सरकार मुसलमान को रिफ्यूजी कैम्प में डाल देगी।

इन मुस्लिम प्रदर्शनकारियों को देखकर साफ़ अंदाजा लगाया जा सकता है की इन्हें कुछ कट्टरपंथी मुस्लिम भड़का रहे हैं और ये बहकावें में आकर ये सड़क पर पत्थरबाजी और आगजनी करके सरकारी सम्पत्तियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं क्या है नागरिका संसोधन कानून और एनआरसी।

नागरिकता संसोधन कानून 2019 भारत के तीन पड़ोसी देशों से धार्मिक उत्पीड़न ही वजह से भारत आने वाले अल्पसंख्यकों को सिटिजनशिप देने के लिए है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश जैसे भारत के पड़ोसी देशों में सिख, जैन, हिंदू, बौद्ध, इसाई और पारसी अल्पसंख्यक हैं. ये तीनों देश मुस्लिम राष्ट्र हैं, इस वजह से उनमें धार्मिक अल्पसंख्यक को उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है।

नागरिकता संशोधन कानून में प्रावधान है कि अगर इन तीन देशों के छह धर्म के लोग भारत में 31 दिसंबर 2014 तक आ चुके हैं तो उन्हें घुसपैठिया नहीं माना जाएगा। उन्हें इस कानून के तहत भारत की नागरिकता दी जाएगी, अगर इसे सीधे शब्दों में समझें तो एनआरसी जहां देश से अवैध घुसपैठियों को बाहर निकालने की कवायद है, वहीं नागरिकता कानून 2019 देश में आ चुके छह धर्म के लोगों को बसाने की कोशिश है. जिन लोगों के नाम एनआरसी में शामिल नहीं हैं, वह अवैध नागरिक कहलाए जाएंगे. एनआरसी के हिसाब से 25 मार्च 1971 से पहले असम में रह रहे लोगों को भारतीय नागरिक माना गया है।