क्या है RCEP समझौता, जिसपर मोदी सरकार ने नहीं किया हस्ताक्षर: पढ़ें

नई दिल्ली, 5 नवंबर: 16 देशों के बीच होने वाले क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी ( RCEP ) समझौते पर भारत सरकार ने दस्तखत करने से इनकार कर दिया है…आइये जानते हैं क्या है RCEP समझौता।

क्या है RCEP समझौता

बता दें कि – RCEP एक ऐसा प्रस्त‍ावित व्यापक व्यापार समझौता है जिसके लिए आसियान के 10 देशों के अलावा 6 अन्य देश-चीन, भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्ष‍िण कोरिया, जापान और न्यूजीलैंड के बीच बातचीत चल रही है। के द्वारा सभी 16 देशों को शामिल करते हुए एक एकीकृत बाजार बनाए जाने का प्रस्ताव है, जिससे इन देशों के उत्पादों और सेवाओं के लिए एक-दूसरे देश में पहुंच आसान हो जाएगी। लेकिन ये भारत के हिसाब से ये सही नहीं था. इसलिए मोदी सरकार ने इस समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किया।

मोदी सरकार ने क्यों नहीं किया RCEP समझौते पर हस्ताक्षर

प्राप्त जानकारी के मुताबिक़, भारतीय उद्योग जगत ने RCEP समूह में चीन की मौजूदगी को लेकर चिंता जताई है। डेयरी, धातु, इलेक्ट्रॉनिक्स और रसायन समेत विभिन्न क्षेत्रों ने सरकार से इन क्षेत्रों में शुल्क कटौती नहीं करने का आग्रह किया है। उद्योग जगत को आशंका है कि आयात शुल्क कम या खत्म होने से विदेशों से अधिक मात्रा में माल भारत आएगा और स्थानीय उद्योगों पर इसका बुरा असर होगा।

अमूल ने भी डेयरी उद्योग को लेकर चिंता जाहिर की थी। वहीं किसान संगठन कड़ी आपत्ति जता रहे थे। किसानों का कहना है कि ये संधि होती है तो देश के एक तिहाई बाजार पर न्यूजीलैंड, अमेरिका और यूरोपीय देशों का कब्जा हो जाएगा और भारत के किसानों को इनके उत्पाद का जो मूल्य मिल रहा है, उसमें गिरावट आ जाएगी। इस लिए मोदी सरकार ने देशहित में फैसला लेते हुए इस समझौते पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।

दरअसल इस समय चीन और अमेरिका का ट्रेंड वार चल रहा है। चीन अपना सामान अमेरिका में नहीं बेंच पा रहा है। अगर भारत रेप समझौते पर हस्ताक्षर कर देता तो चीनी सामान भारत में इफराद हो जाते। इससे भारतीयों को बहुत ज्यादा नुकसान होता। इसलिए भारतवासी इस समझौते का विरोध कर रहे थे। और मोदी सरकार ने देशहित में फैसला लेते हुए इसपर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया।