अयोध्या मामले में जानिए कौन-कौन से मुख्य पक्षकार हैं, जिनकी दलीलों पर फैसला आना है

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नई दिल्ली, 9 नवंबर: कई दशकों से लटके अयोध्या रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ अपना फैसला सुनाएगी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पूरे देशभर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

अयोध्या फैसले से पहले देशवासियों के मन में चल रहा होगा की हिन्दू पक्ष अयोध्या में रामजन्मभूमि स्थान चाहते हैं जिसपर पर वो राम मंदिर का निर्माण करना चाहते हैं तो वहीँ मुस्लिम पक्ष मस्जिद चाहते हैं। और सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा की अयोध्या में मस्जिद बनेगा या मंदिर। जी हाँ, ऐसा नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट अपनी भाषा में अपना फैसला सूट नंबर या वाद संख्या में सुनाएगा। की हमनें सूट नंबर या वाद संख्या इसको अलाउ कर दिया है। आइये जानते हैं कौन-कौन हैं वो पक्षकार ( सूट नंबर ) जिनकी दलीलों पर आज सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा।

सूट नंबर – 1 : गोपाल सिंह विशारद का है, जो 1950 में दाखिल हुआ था। गोपाल सिंह विशारद हिन्दू महासभा के नेता थे, जो भक्त होने के नाते उन्होंने भगवान राम की पूजा का अधिकार माँगा था। तो ये पूजा के अधिकार का मामला हैं, एक तरह आप कह लीजिये उसी जगह पर मंदिर का निर्माण हो और देवता विराजित रहे।

सूट नंबर – 2 : महंत रामचंद्र परमहंस की थी, जिसको उन्होंने बाद में वापस ले लिया था रामलला विराजमान के पक्ष में तो अब वो लिस्ट से बाहर है।

सूट नंबर – 3 : निर्मोही अखाड़ा है, निर्मोही अखाड़ा की सुप्रीम कोर्ट में दलील है की, मंदिर बनें लेकिन नियंत्रण हमारा होगा।

सूट नंबर 4 – : सुन्नी वक्फ बोर्ड और दूसरे तमाम मुस्लिम पक्षकार एक साथ क्लब हैं और कह रहे हैं की वहां मस्जिद थी मस्जिद ही होनी चाहिए। अगर मंदिर को जगह देनी भी है, तब भी हमें पूरी तरह बाहर नहीं कर सकते।

सूट नंबर – 5 : जो 1889 में दाखिल हुआ और उसके बाद पूरे केस का परिदृश्य बदल गया, वो रामलला विराजमान के नाम से है, जहाँ ये कहा जा रहा है की रामलला विराजमान एक शिशु के रूप में हैं, उनके अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता। वो जगह पूरी की पूरी उनकी है, यहाँ तक की इसी केस में यह भी दावा है की श्रीराम जन्मस्थान भी एक व्यक्ति है, एक देवता है, उसका बंटवारा नहीं किया जा सकता है। तो ये 5 सूट है, इन्हीं के आधार पर सुप्रीम कोर्ट आज अपना फैसला सुनाएगा।