संजय राउत के जरिये भाजपा के खिलाफ काफी दिनों से जहर उगलवा रहे हैं ठाकरे, इसलिए बिगड़े रिश्ते

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नई दिल्ली: भाजपा और शिवसेना केंद्र सरकार में भी साझीदार हैं, शिवसना NDA गठबंधन में है, महाराष्ट्र में भी गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ा था, गठबंधन का मतलब होता है दोस्ती लेकिन शिवसेना के लिए गठबंधन सत्ता की सीधी चढ़ने का माध्यम है इसीलिए शिवसेना ने चुनाव नतीजे आने के बाद से ही भाजपा के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया। बिना जहर उगले ही अपनी मांगे रखी जा सकती हैं लेकिन शिवसेना ने अपनी मांगों को मनवाने के लिए धमकी और ब्लैकमेलिंग का सहारा अपनाया जो भाजपा को रास नहीं आया और आज दोनों पार्टियों के बीच में रिश्ते टूट रहे हैं।

महाराष्ट्र में भाजपा को 105 सीटें मिलीं हैं जबकि शिवसेना को सिर्फ 56 सीटें, भाजपा की जीत का पर्सेंटेज और मार्जिन भी शिवसेना से अधिक है उसके बावजूद शिवसेना महाराष्ट्र में अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहती है, शिवसेना ने सरकार बनाने के लिए भाजपा को समर्थन नहीं दिया जिसकी वजह से भाजपा ने सरकार बनाने से इंकार कर दिया है, इससे पहले शिवसेना ने भाजपा को ब्लैकमेल करने वाली बयानबाजी की, कभी कहते हैं कि हमारे पास 170 विधायकों का समर्थन है, कभी कहते हैं की महाराष्ट्र में हम भाजपा के बिना भी सरकार बना सकते हैं।

अब महाराष्ट्र के राज्यपाल ने शिवसेना को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया है, शिवसेना बिना एनसीपी और कांग्रेस के समर्थन के सरकार नहीं बना सकती। एनसीपी ने थोड़ा पॉजिटिव रेस्पोंस दिया है जबकि कांग्रेस की वर्किंग कमेटी की बैठक के बाद ही कोई निर्णय आएगा।

कुल मिलाकर कहें तो सत्ता के लिए शिवसेना ने भाजपा को धोखा दिया है, पूरा देश इस धोखेबाजी को देख रहा है इसलिए शिवसेना को एनसीपी और कांग्रेस का समर्थन हासिल करना आसान नहीं होगा, दोनों पार्टियों को हमेशा यही लगेगा की शिवसेना आगे चलकर उनके रास्ते का सबसे बड़ा काँटा बन जाएगी क्योंकि भाजपा से रिश्ता टूटने पर अगर शिवसेना पार्टी का मुख्यमंत्री बनाया गया तो अगले चुनाव में शिवसेना भाजपा के खिलाफ मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरेगी और एनसीपी कांग्रेस की सीटें कम हो जाएंगी, ये भी हो सकता है कि एनसीपी और कांग्रेस का अस्तित्व ही मिट जाए क्योंकि महाराष्ट्र में अब भाजपा बनाम शिवसेना की लड़ाई होगी।

शिवसेना अब ऐसी पार्टी बन गयी है जिसका भरोसा करने से सभी पार्टियां डरेंगी। शिवसेना ने गठबंधन धर्म को धोखा दिया है। कम विधायक होने के बाद भी अपना मुख्यमंत्री बनाने की मांग करना और भाजपा को समर्थन ना देना किसी को भी समझ में नहीं आ रहा है। शिवसेना किसी भी कीमत पर अपना मुख्यमंत्री बनाना चाहती है चाहे इसके लिए कुछ भी करना पड़े।