वकीलों के खिलाफ छलका पुलिसवालों का दर्द, कहा- हमारे हाथ बंधे हुए हैं वरना हम नानी याद दिला देते

नई दिल्ली, 5 नवंबर: 2 नवंबर को दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में वकीलों और पुलिसवालों के बीच शुरू हुई झड़प थमने का नाम नहीं ले रही है। पुलिसवाले तो तीस हजारी कोर्ट के बाद शांत हो गए और अपनी ड्यूटी पर लग गए, लेकिन वकीलों ने कई राज्यों में हंगामा खड़ा कर दिया। यहाँ तक की दिल्ली के साकेत कोर्ट के बाहर एक पुलिसवाले को रुकवाकर जमकर पीटा। इसके अलावा वीडियो बना रहे एक निर्दोष ऑटो चालक को भी घसीट-घसीटकर पीटा।

वकीलों की गुंडागर्दी के बाद पुलिसवालों का दर्द छलका है। पुलिसकर्मियों का कहना है कि हमारे हाथ बंधे हुए हैं वरना हम इन गुंडे वकीलों की नानी याद दिला देते। सोशल मीडिया पर पुलिसवालों की एक जबरदस्त कविता वायरल हो रही है। यह कविता तीस हजारी कोर्ट बवाल और वकीलों द्वारा की गयी पुलिसवाले की पिटाई से सम्बंधित है।

पुलिस में भर्ती होना ही तो बस जुर्म हो गया उदयभान से,
वर्ना हम भी तो पहले इन्सान होते थे कसम ईमान से!
ना कायर हैं ना कमजोर हैं, बस बंधे है कानून से,
वर्ना क्या मजाल उन वकीलों की जो चूं भी कर जाए जबान से!
कमान से निकला तीर और जबान से निकला शब्द कभी लौटकर वापस नहीं आता अपने स्थान पे,
तो क्यों खेलते है कुछ लोग पुलिसवालों के मान – सम्मान से!
हम तो पुलिस हैं और पुलिस में तो विरोध भी नहीं कर सकते जबान से,
अगर ना होती पाबंदिया तो नानी याद दिला देते तीस हजारी के मैदान में!

बता दें कि – 2 नवंबर को दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट के बाहर पार्किंग को लेकर वकीलों और पुलिसवालों के बीच मामूली विवाद उग्र हो गया और हिंसा का रूप ले लिया। वकीलों ने पुलिसवालों की कई गाड़ियां फूंक दी। इसके अलावा वकीलों ने सोमवार को दिल्ली के साकेत कोर्ट के बाहर पेट्रोलिंग कर रहे एक पुलिसकर्मी को खूब पीटा।