रिश्वत लेना, जनता को टॉर्चर करना, वर्दी का घमंड छोड़ दें पुलिसवाले तो जनता भी देगी इनका साथ

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नई दिल्ली: अब तक आपने देखा होगा कि पुलिस वाले जनता को दौड़ा दौड़ा कर पीटते थे लेकिन दिल्ली में पहली बार हुआ कि वकीलों ने पुलिसवालों को दौड़ा दौड़ा कर पीटा। पुलिस वाले इतने असहाय दिखे कि अपनी हिफाजत भी नहीं कर पाए और अपनी सुरक्षा की मांग करते हुए करीब 15000 पुलिसकर्मियों ने दिल्ली पुलिस हेडक्वार्टर के बाहर धरना दिया।

अब सवाल ये उठता है कि आखिर पुलिस वकीलों के आगे इतनी मजबूर क्यों हो गयी कि धरनेबाजी का सहारा लेना पड़ा, इसकी वजह से है वकीलों की एकता। संख्या में पुलिस वकीलों के बराबर ही है लेकिन वकीलों में एकता अधिक है, इसके अलावा पुलिस को अदालतों में ही जाना पड़ता है जहाँ पर वकीलों की ही चलती है।

दूसरा सवाल ये उठता है कि पुलिस को पिटता देखकर जनता को पुलिसवालों से सहानुभूति क्यों नहीं हुई, इसका उत्तर है पुलिस विभाग में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार। अगर भ्रष्टाचार की चर्चा होती है तो यही कहा जाता है कि पुलिस विभाग में सबसे अधिक रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार है, जनता को इतना परेशान किया जाता है कि उन्हें थानों में जाने से डर लगता है, कुछ पैसों के लालच में पुलिसवाले जनता पर अनाप शनाप केस ठोंककर उनकी जिंदगी बर्बाद कर देते हैं, धाराएं जोड़ने का पैसा, धाराएं हटाने का पैसा, समझौता कराने का पैसा, कार्यवाही करने के लिए पैसा अलग, कार्यवाही ना करने का भी पैसा, गिरफ्तारी करने के लिए पैसा, गिरफ्तारी ना करने के लिए पैसा, किसी को झूठे केस में फंसाने का पैसा, केस दबाने का पैसा। मतलब हर चीज में पैसा।

हर पुलिसकर्मी रिश्वतखोर और भ्रष्ट नहीं है लेकिन कुछ मछलियां पूरे तालाब को गन्दा कर देती है। अगर पुलिस में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी ख़त्म हो जाए तो जनता इनके साथ खड़ी होगी, इन्हें बचाएगी भी और इनके साथ आंदोलन में भी शामिल होगी, लेकिन ऐसा होना असंभव सा लगता है क्योंकि भ्रष्टाचार ने पुलिस विभाग को अपने शिकंजे में जकड रखा है। यही वजह है कि आज पुलिसवालों को अकेले ही लड़ाई लड़नी पड़ रही है।