हिंदी दिवस पर हिंदी के विरोध में खुलकर उतरे ओवैशी, ममता और स्टालिन

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नई दिल्ली, 14 सितम्बर: पूरा दिवस आज हिंदी दिवस मना रहा है…लेकिन इसी हिंदी के विरोध में असदुद्दीन ओवैशी, ममता बनर्जी और एमके स्टालिन जैसे नेता खुलकर सामने आ गए हैं.

दरअसल, गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि – पूरे देश की एक भाषा होना अत्यंत आवश्यक है जो दुनिया में भारत की पहचान बने। आज देश को एकता की डोर में बांधने का काम अगर कोई भाषा कर सकती है तो वह सर्वाधिक बोली जाने वाली हिंदी भाषा ही है।

गृहमंत्री अमित शाह के इसी बयान के विरोध में असदुद्दीन ओवैशी, ममता बनर्जी और एमके स्टालिन ने मोर्चा खोल दिया है.

ओवैसी ने ट्वीट कर कहा, हिंदी हर भारतीय की मातृभाषा नहीं है। क्या आप इस देश की कई मातृभाषाएं होने की विविधता और खूबसूरती की प्रशंसा करने की कोशिश करेंगे। हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने आगे कहा कि अनुच्छेद 29 हर भारतीय को अपनी अलग भाषा और कल्चर का अधिकार देता है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कहा कि – हमें सभी भाषाओं और संस्कृतियों का समान रूप से सम्मान करना चाहिए। हम कई भाषाएं सीख सकते हैं लेकिन हमें अपनी मातृभाषा को कभी नहीं भूलना चाहिए।

वहीँ एमके स्टालिन ने कहा कि – हम लगातार हिंदी को थोपे जाने का विरोध कर रहे हैं। आज अमित शाह द्वारा की गई टिप्पणी से हमें आघात पहुंचा है, यह देश की एकता को प्रभावित करेगा। हम मांग करते हैं कि वह बयान वापस लें।

बता दें कि – हिंदी भाषा का गुणगान भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी होता है, लेकिन कुछ भारतीय नेताओं को ही हिंदी नहीं पसंद आ रही है.