अगर बीजेपी को बहुमत न मिलता तो JDU और शिवसेना कभी भी कर सकती थी गद्दारी

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नई दिल्ली, 16 जून: लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी ने प्रचंड बहुमत से जीत हासिल की, अकेले बीजेपी को 303 सीटें मिलीं, जबकि पूरे NDA को 352 सीटें मिलें, इस तरह अगर NDA को छोड़ दिया जाय तो बीजेपी अकेले दम पर बहुमत से ज्यादा सीटें हासिल करनें में कामयाब हुयी।

अगर बीजेपी अपनें दम पर बहुमत हासिल न कर पाती तो उसके घटक दल जेडीयू, शिवसेना कभी गद्दारी कर सकते थे, क्योंकि जबसे नई सरकार बनी है तबसे, जेडीयू और शिवसेना के बदले-बदले सुर दिख रहे हैं.

क्योंकि मोदी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में फैसला लिया गया कि तीन तलाक बिल फिर से लाया जाएगा, इसके बाद जेडीयू ने साफ़ शब्दों में कह दिया कि हम इस बिल का समर्थन कतई नहीं करेंगें, इसके अलावा बीजेपी का मुख्य मुद्दा कश्मीर से धारा 370 हटाना, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण कराना, इन सब मुद्दों पर भी जेडीयू बीजेपी का साथ नहीं देगी, और तो और बिहार को छोड़कर कई राज्यों में जेडीयू अकेले ही मैदान में उतरने का एलान किया है. इसी तरह शिवसेना भी महाराष्ट्र में ब्लैकमेलिंग, कभी कहती है अगला मुख्यमंत्री शिवसेना से होगा, तो कभी कहती है लोकसभा का डिप्टी स्पीकर पद हमें चाहिए। इसके अलावा राम मंदिर पर भी शिवसेना अलग राजनीति कर रही है.

ये दोनों पार्टियां अपना रवैया तब ऐसा दिखा रही हैं, जब बीजेपी की पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनी है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अगर बीजेपी की पूर्ण बहुमत से सरकार न होती तो जेडीयू और शिवसेना कभी भी बीजेपी से गद्दारी कर सकती थी, मालूम हो कि शिवसेना ने तो 2014 चुनाव के बाद कुछ दिन साथ रहने के बाद समर्थन वापस ले लिया था, लेकिन उसके बाद शिवसेना हवा का रुख भांप गयी और फिर से NDA के साथ आ गयी.

वैसे अगर शिवसेना, जेडीयू अगर बीजेपी का साथ छोड़ भी देते हैं तब भी बीजेपी को 5 साल तक कोई फर्क पड़नेँ वाला नहीं है.