कांग्रेस सरकार में 3% दलित बनें थे केंद्रीय मंत्री, मोदी सरकार में 10% दलित बनें केंद्रीय मंत्री

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नई दिल्ली, 9 जून: लोकसभा चुनाव ख़त्म हो गए और बीजेपी ने प्रचंड बहुमत हासिल करके लगातार सरकार दूसरी बार सरकार बनानें में कामयाब रही…सरकार बनने के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल का गठन भी हो गया.

केंद्रीय मंत्रिमंडल का गठन होने के बाद विपक्षी पार्टियों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया कि मोदी सरकार दलितों को तरजीह नहीं देती, इसी कारण बहुत कम दलितों को मोदी मंत्रिमंडल में जगह मिली है…लेकिन विपक्ष के इन सब आरोपों के बीच एक चौंकाने वाले आंकड़े सामने आये हैं.

आंकड़े के मुताबिक़, 1952 में जब जवाहर लाल नेहरू प्रधानमंत्री बनें थे तो केंद्रीय मंत्रिमंडल में दलितों की संख्या 3.92 % थी, 1977 में मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बनें थे तब केंद्रीय मंत्रिमंडल में दलितों की संख्या 4 .17 % थी, 1984 में राजीव गांधी प्रधानमंत्री बनें थे, केंद्रीय मंत्रिमंडल में दलितों की संख्या 3.67% थी, 1989 में वीपी सिंह प्रधानमंत्री बनें थे, केंद्रीय मंत्रिमंडल में दलितों की संख्या 2.6% थी, 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बनें थे उस समय केंद्रीय मंत्रिमंडल में दलितों की संख्या 10% थी, 2004 में डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनें थे, केंद्रीय मंत्रिमंडल में दलितों की संख्या 6.33% थी, 2009 में फिर से मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बनें, केंद्रीय मंत्रिमंडल में दलितों की संख्या 0.6% थी, 2014 में नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनें, केंद्रीय मंत्रिमंडल में दलितों की संख्या 10.53% थी, 2019 में एक बार फिर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनें, केंद्रीय मंत्रिमंल में दलितों की संख्या 10.34 है.

आंकड़ों पर गौर करें तो कांग्रेसियों ने दलितों को कभी नहीं तरजीह दी, अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बनते ही उन्होंने दलितों का ध्यान दिया और 10 फीसदी दलितों को मंत्री बनाया उसके बाद, फिर से कांग्रेसियों का राज आ गया और फिर दलितों के साथ अन्याय होने लगा, उसके बाद मोदी सरकार आई, तब जाकर फिर केंद्रीय मंत्रिमंडल में दलितों की संख्या बढ़ गयी.

इसके बावजूद विपक्षी और कुछ दलितों के ठेकेदार कहते हैं कि मोदी सरकार तो दलितों से नफरत करती है..सच ये है कि दलितों से नफरत तो कांग्रेस करती है.