इस चुनाव में विपक्षी पार्टियों ने नहीं लिया आलू, टमाटर, प्याज, पेट्रोल, मंहगाई का नाम, क्योंकि

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फरीदाबाद: पहली बार ऐसा चुनाव हुआ है जिसमें विपक्षी पार्टियों ने मंहगाई को मुद्दा नहीं बनाया है, अबकी बार सिर्फ चौकीदार चोर है को मुद्दा बनाया गया है, पहले सब्जियों के दामों में काफी उछाल देखने को मिलता था, कभी आलू मंहगी, कभी टमाटर मंहगा, कभी प्याज मंहगी, कभी पेट्रोल मंहगा. पिछले एक दो वर्षों से आलू, टमाटर और प्याज के दाम बढे ही नहीं. आम लोग सस्ते और किफायती दामों में सब्जियां खा रहे हैं इसलिए विपक्षी पार्टियों ने इस चुनाव प्रचार में आलू, टमाटर प्यार और मंहगाई का नाम नहीं लिया.

आपको बता दें कि पाकिस्तान में टमाटर के दाम 300 के ऊपर है, लोग टमाटर खाने को तरस रहे हैं लेकिन भारत के लोग 20-30 रुपये में टमाटर खा रहे हैं, पहले प्याज के दाम 100 रुपये से ऊपर पहुँच जाते थे और विपक्षी पार्टियाँ प्याज की माला पहनकर प्रदर्शन करती थीं लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ, इसी तरह से आलू के दाम भी 50-60 पहुँच जाते थे लेकिन इस बार 10 प्रति किलो के हिसाब से आलू मिल रही है. पेट्रोल जरूर थोड़े समय के लिए ऊपर गया था लेकिन अब कण्ट्रोल है.

पेट्रोल-डीजल के दामों को भी चुनाव में मुद्दा नहीं बनाया गया. ऐसा इसलिए क्योंकि भाजपा शासित राज्यों में कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों द्वारा शासित राज्यों में पेट्रोल मंहगा है. भाजपा सरकारों से तेल के दामों में कटौती की थी जबकि विपक्षी पार्टियों ने कटौती नहीं की.

अब आप समझ सकते हैं जब विपक्षी पार्टियाँ अपने राज्यों में मंहगा पेट्रोल-डीजल बेच रही हैं तो वे पेट्रोल-डीजल के दामों को किस मुंह से मुद्दा बनाएंगी.

पहली बार विपक्षी नेता चुनावी रैलियों में मंहगाई को लेकर कुछ नहीं बोलते क्योंकि मंहगाई बढ़ी ही नहीं है, GST कानून की वजह से मंहगाई पर कंट्रोल है, खाने पीने के दामों में उछाल नहीं आ रहा है, जमाखोरी नहीं हो रही है. आम जनता को पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है.

इस बार विपक्षी पार्टियों ने सिर्फ चौकीदार चोर है को बड़ा मुद्दा बनाया है. मोदी को चोर बताकर कांग्रेस और गठबंधन के लोग चुनाव जीतना चाहते हैं लेकिन जनता सोच समझकर वोट देगी. अब देखते हैं जनता चौकीदार चोर है मुद्दे पर वोट देती है या सस्ते टमाटर, प्यार आलू और पेट्रोल-डीजल के आधार पर केंद्र सरकार को आशीर्वाद देती है.