कभी मुलायम से इज़्ज़त, जान की भीख माँगने वाली मायावती अब निडर होकर मुलायम के बग़ल में बैठी हैं

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लखनऊ, 20 अप्रैल: जंग, इश्क़ की तरह चुनाव में भी सब जायज़ है..? जी हाँ, इस बात को बसपा अध्यक्ष मायावती ने शुक्रवार को मैनपुरी  में सच साबित कर दिया.

बता दें कि किसी ज़माने में मुलायम सिंह यादव से इज्जत और जान की भीख मांगने वाली मायावती शुक्रवार को मैनपुरी में में निडर होकर मुलायम सिंह यादव के बग़ल में बैठी थी…? यही नहीं मायावती माइक लेकर जोर-जोर से चिल्ला रही हैं कि मोदी के राज में बहन बेटियां सुरक्षित नही हैं। इसलिए ये चुनाव है, इसमें सबकुछ जायज है.

मायावती ने मैनपुरी में रैली को संबोधित करते हुए पहले लखनऊ गेस्ट हाउस काण्ड का जिक्र किया, उसके बाद कहा कि कभी-कभी बड़े फैसले लेने पड़ते हैं.

क्या है गेस्ट हाउस काण्ड

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 1993 में समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव और बीएसपी प्रमुख कांशीराम ने गठजोड़ किया था. उस समय उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश का हिस्सा था और कुल सीट थीं 422. मुलायम 256 सीट पर लड़े और बीएसपी को 164 सीट दी थीं. चुनाव में एसपी और बीएसपी गठबंधन जीता. एसपी को 109 और बीएसपी को 67 सीट मिली थीं इसके बाद मुलायम सिंह यादव बीएसपी के समर्थन से मुख्यमंत्री बने.

लेकिन, आपसी मनमुटाव के चलते 2 जून, 1995 को बसपा ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया, इस वजह से मुलायम सिंह की सरकार अल्पमत में आ गई. तो नाराज सपा के कार्यकर्ता लखनऊ के मीराबाई मार्ग स्थित स्टेट गेस्ट हाउस पहुंच गए, जहां मायावती कमरा नंबर-1 में ठहरी हुई थीं. 2 जून 1995 के दिन उत्तर प्रदेश की राजनीति में जो हुआ वह शायद ही कहीं हुआ होगा. मायावती पर गेस्ट हाउस के कमरा नंबर एक में हमला हुआ था. 2 जून 1995 को मायावती लखनऊ के स्टेट गेस्ट हाउस के कमरा नंबर एक में अपने विधायकों के साथ बैठक कर रही थीं. तभी दोपहर करीब तीन बजे कथित समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं की भीड़ ने अचानक गेस्ट हाउस पर हमला बोल दिया. उस दिन को याद करके मायावती सिहर उठती हैं, लेकिन राजनीति में सब जायज है.

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