जो काम अकबर-औरंगजेब नहीं करवा पाए, कांग्रेस ने किया करवाने का प्रयास लेकिन अरमानों पर फिर पानी

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रामसमंद: बाबर की औलादों और मुगलों ने हमारे पूरे देश को इस्लामिक देश बनाने का प्रयास किया था लेकिन हिन्दुओं की आस्था को वे बदल नहीं पाए. राजस्थान में ऐसे कई किले हैं जिस पर मुग़ल कब्जा नहीं कर सके, कुम्भलगढ़ किला भी उन्हीं ऐतिहासिक इमारतों में से एक है. अकबर और औरंगजेब वहां पर नमाज नहीं पढवा पाए लेकिन हाल ही में कांग्रेस सरकार बनने के बाद इतिहास बदलने का प्रयास किया गया लेकिन कांग्रेस सरकार को अपने कदम पीछे खींचने पड़े.

नीचे पोस्टर में आप देख सकते हैं, कुम्भलगढ़ किले पर नमाज पढने के लिए जश्ने-गरीब-नवाज नाम का एक कार्यक्रम रखा गया है. आज वहां पर लाखों मुस्लिमों ने इकठ्ठे होकर नमाज पढने का कार्यक्रम तय किया था लेकिन सोशल मीडिया पर भारी विरोध के चलते कांग्रेस सरकार ने कार्यक्रम रद्द करवा दिया.

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क्या है किले का इतिहास

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जिस तरह से चीन की दीवार मशहूर है उसी तरह से रामासमंद जिले में पड़ने वाला कुम्भलगढ़ किले की दीवारें मशहूर हैं. इस किले का निर्माण 15वीं सदी में राणा कुम्भा ने करवाया था, मेवाण क्षेत्र का यह किला बनास नदी के किनारे बना है जिसे रोजाना हजारों लोग देखने आते हैं, इसके आसपास काफी मंदिर हैं जिसे मुगलों ने तोड़ने का प्रयास किया लेकिन हिन्दुओं ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया.

आप समझ सकते हैं कि कुम्भलगढ़ किले और इसके आसपास के मंदिरों से हिन्दुओं की कितनी श्रद्धा जुडी है, कांग्रेस ने इसके साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की लेकिन यह उनकी भूल साबित हुई और उन्हें अपने कदम पीछे खींचने पड़े लेकिन इस मामले को अखबारों ने दबा देना चाहता लेकिन सोशल मीडिया को कोई दबा नहीं सकता इसलिए कांग्रेस सरकार को पीछे हटना पड़ा.