सना खान के बयान से उठे सवाल, रात को गाडी खड़ी करके अन्दर क्या कर रहे थे दोनों, क्यों भागा विवेक?

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लखनऊ, 1 अक्टूबर: लखनऊ में हुए विवेक तिवारी हत्याकांड ने काफी तूल पकड़ लिया है, मीडिया चैनलों ने इसे अपनी TRP बढ़ाने का मैटर बना लिया है. उत्तर प्रदेश पुलिस पर बड़े बड़े आरोप लगाए जा रहे हैं लेकिन गवाह सना खान के बयान से कई सवाल उठ रहे हैं साथ ही यूपी पुलिस वालों को हत्यारा बताने वाली मीडिया चैनलों पर भी सवाल उठ रहे हैं.

CCTV कैमरों में दिखा है कि रात 12.19 बजे घटनास्थल से सिर्फ 50 मीटर पहले विवेक तिवारी सना खान के साथ अपनी कार में गोमतीनगर इलाके में दिखे थे, उसके एक घंटे के बाद विवेक और पुलिस वालों में कहासुनी हुई थी जिसके बाद विवेक ने भागने का प्रयास किया और पुलिस वाले ने गोली चला दी.

अब सवाल यह उठता है कि रात में साढ़े 12 बजे से डेढ़ बजे तक रोड के किनारे गाडी खड़ी करके विवेक और सना खान क्या कर रहे थे, यह भी पता चला है कि जब दोनों लोग गाडी के अन्दर थे तो लाइट बंद थी, आखिर लाइट बंद करके एक घंटे तक कार में क्या हुआ.

उसके बाद जब पुलिस आयी और दोनों को गाड़ी के अन्दर देखा तो पुलिस वालों को शक हुआ होगा, शीशा खुलवाने का प्रयास किया गया तो विवेक तिवारी ने भागने की कोशिश की, अब सवाल यह उठता है कि विवेक ने भागने की कोशिश क्यों की. जब भी कोई भागता है तो पुलिस का शक बढ़ जाता है, इसके अलावा विवेक ने एक पुलिस वाले की बाइक पर गाडी चढाने की कोशश की जिसकी वजह से दूसरे पुलिस वाले का शक बढ़ गया और उसनें गोली चला दी जो सीधी गर्दन में जाकर लगी और विवेक की मौत हो गयी. जब पुलिस वाले ने गोली चलाई तो शीशा बंद था इसलिए पुलिस वालों को भी नहीं पता रहा होगा कि अन्दर कौन था. बस बदमाश समझकर तुक्के में गोली चलाई गयी होगी.

विवेक की मौत दुखद है लेकिन अगर उनकी जगह कोई बड़ा अपराधी होता तो पुलिस वालों की अब तक पीठ थपथपाई जा रही होती लेकिन विवेक निर्दोष था इसलिए पुलिसवाले फंस गए.

सना के बयान से उठे सवाल

पुलिस में दर्ज एफआईआर के मुताबिक, मैं सना अपने कलीग के साथ जा रही थी, उनका नाम विवेक तिवारी है. CMS गोमती नगर विस्तार के पास हमारी गाड़ी खड़ी हुई थी, तब तक सामने से पुलिसवाले आए, हमने उनसे बचकर निकलने की कोशिश की, उन्होंने हमें रोकने की कोशिश की, उसके बाद अचानक से ऐसा लगा कि गोली चली, हमने वहीं से गाड़ी आगे बढ़ाई, आगे हमारी गाड़ी अंडरपास दीवार से टकराई और विवेक का काफी खून बहने लगा, मैंने सबसे मदद लेने की कोशिश की, थोड़ी देर में पुलिस आई, जिसने हमें हॉस्पिटल पहुंचाया, सूचना मिली है कि विवेक की मृत्यु हो चुकी है.

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कुछ मीडिया वाले अपनी TRP बढाने के लिए यह भी खबर चला रहे हैं कि FIR में दोनों आरोपी पुलिस वालों का नाम नहीं है और पुलिस उन्हें बचाने की कोशश कर रही है, असलियत ये है कि मर्डर में शुरुआती FIR में अधिकतर में अज्ञात नाम ही लिखे जाते हैं लेकिन जांच में उनका नाम शामिल कर लिया जाता है, इस मामले में भी यही हुआ है और दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भी भेज दिया गया है लेकिन मीडिया ने अपनी TRP के लिए उल्टी सीधी ख़बरें दिखानी शुरू कर दी हैं.