संलेखना करके जैन मुनि तरुण सागर ने त्याग दी जिंदगी, पढ़ें क्या होता है संलेखना

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नई दिल्ली, 1 सितम्बर: जैन मुनि तरुण सागर का 51 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. वह कई दिनों से दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल में गंभीर हालत में भर्ती थे लेकिन संलेखना तपस्या की वजह से खाना पानी और दवा छोड़ चुके थे. इस तपस्या के लिए उन्होंने अपने गुरु से सलाह ली थी.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि संलेखना एक तपस्या है जिसमें खाने-पानी का त्याग कर दिया जाता है. खाने पानी का त्याग करने की वजह से जैन मुनि तरुण सागर को पीलिया हो गया था.

उनकी हालत बिगड़ने पर 20 दिन पहले उन्होंने दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया लेकिन उन्होंने इलाज से इनकार कर दिया और दिल्ली के कृष्ण नगर स्थति राधापुरी जैन मंदिर चातुर्मास स्थल पर जाने का निर्णय किया.

राधापुरी जैन मंदिर में वे जिस कमरे में ठहरे थे वहां पर सिर्फ जैन मुनियों और शिष्यों को ही जाने की इजाजत थी, आज उनका 51 वर्ष की उम्र में निधन हो गया.