गैंगरेप केस: बल्लभगढ़ के DCP, ACP और IO पर आरोपियों से मिलीभगत का आरोप, CM और CP से हुई शिकायत

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फरीदाबाद, 28 अगस्त: 10 महीना पहले त्रिखा कॉलोनी गैंगरेप, लूट और अपहरण मामले की पीड़िता ने बल्लभगढ़ के DCP, ACP और केस की जांच कर रही बल्लभगढ़ महिला पुलिस थाने की सब-इंस्पेक्टर नीलम के खिलाफ मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और पुलिस कमिश्नर अमिताभ सिंह ढिल्लों से शिकायत कर दी है. (शिकायत नंबर: CMOFF/N/2018/101711).

अपनी शिकायत में पीडिता ने कहा है कि 10 महीना दौड़ते दौड़ते किसी तरह पुलिस ने FIR (No. 0061) दर्ज की. वे लोग 10 महीनें तक आरोपियों को बचाते रहे, जब मेरे साथ गैंगरेप हुआ और VIDEO बनाई गयी तो पुलिस ने आरोपियों से मिलकर मेरा मेडिकल नहीं होने दिया. अब FIR दर्ज हुई है तो भी पुलिस आरोपियों का साथ दे रही है और मुझे परेशान कर रही है. FIR में भी मेरे बयान लिखे गए हैं और कोर्ट में भी मेरे बयान दर्ज हैं, इसके बाद भी मुझे रोजाना बल्लभगढ़ पुलिस थाने में बुलाया जाता है और बयान लेने के बहाने मेरे मजाक उड़ाया जाता है.

पीडिता ने बताया कि कमिश्नर साहब ने मुझे DCP के पास सबूत दिखाने के लिए भेजा था लेकिन जब मैं वहां गयी तो उन्होंने तरीके से बात नहीं की और मेरे सबूत टेबल पर फेंकते हुए कहा कि मैं इनका क्या करूँगा, इसके बाद मुझे ACP से मिलाया गया तो उन्होंने FIR रद्द करने की धमकी दी, इसके बाद जब मैं SHO से मिली तो उन्होंने मेरा नार्को टेस्ट कराने की धमकी दी. मैं नार्को टेस्ट के लिए भी तैयार हूँ लेकिन वल्लभगढ के पुलिस अधिकारियों का व्यवहार देखकर ऐसा लग रहा है कि ये आरोपियों के साथ मिले हुए हैं और मुझे जान बूझकर परेशान किया जा रहा है, आरोपियों को गिरफ्तार करने के बजाय मुझे ही डराया धमकाया जा रहा है.

पीडिता ने यह भी लिखा है कि जांच अधिकारी नीलम जब मुझे बल्लभगढ़ महिला पुलिस थाने में बुलाती है तो आरोपी की तरफ से 50-60 लोग थाने में इकठ्ठे हो जाते हैं और मुझे डराने-धमकाने का प्रयास किया जाता है. इनसे मेरी जान को खतरा है.

पीडिता ने लिखा कि जब मैं बल्लभगढ़ के किसी भी पुलिस अधिकारी के पास जाती हूँ तो वहां पर आरोपी पक्ष के लोग भी पहुँच जाते हैं और अधिकारी से साठ-गाँठ करके मुझे ही परेशान करवाना शुरू कर देते हैं. पुलिस थानों में चक्कर लगाते लगाते मेरी जिंदगी नरक बन गयी है.

पीडिता ने मांग की है कि इस केस की जांच क्राइम ब्रांच को दी जाए और बल्लभगढ़ के दोषी पुलिस अधिकारियों की जांच करवाकर इनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाए.