15 अगस्त पर मृत्यु से किया इनकार, 16 को स्वर्ग के लिए निकल गए अटलजी, 17 को पञ्चतत्त्व में विलीन

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नई दिल्ली: भारत के सपूत, पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपयी ने आखिरकार 16 अगस्त को शरीर का त्याग करने के बाद 17 को पंचतत्व में विलीन हो गए. आज राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया.

अटल बिहारी वाजपायी अपने नाम की तरह अटल रहे, उन्होंने 15 अगस्त का पर्व देखते हुए उस दिन अपनी मृत्यु को रोक दिया. अगर उनका निधन 15 को होता तो तिरंगे को झुकाना पड़ता लेकिन उन्होंने ऐसा होने नहीं दिया और 15 अगस्त का कार्यक्रम देखकर 16 को दुनिया का अलविदा कर गए.

अटल बिहारी वाजपयी ने एक और अनोखा काम किया. उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी एक कार्यक्रम में 15 अगस्त पर लाल किले पर पाँचों भाषणों को देखा. शायद उनका सपना रहा होगा कि मोदी को पाँचों बार लाल किले पर भाषण देते हुए देखूंगा और उन्होंने अपना सपना पूरा भी किया.

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