एक साजिश के तहत उद्योगपतियों को चोर-लुटेरा बोल रही हैं कुछ राजनीतिक पार्टियाँ, पढ़ें क्या?

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नई दिल्ली: भारत के कुछ बिजनेसमैन बेईमान निकले और बैंकों से अरबों रुपये का कर्ज लेकर फरार हो गए लेकिन उनके चक्कर में भारत की कुछ राजनीतिक पार्टियाँ देश के सभी बिजनेसमैनों को चोर और लुटेरा बताकर उद्योगपतियों का मनोबल तोड़ने की कोशिश कर रही हैं, यह सब एक साजिश के तहत हो रहा है, आज हम बताएंगे कि वह साजिश क्या है.

भारत में बेरोजगार युवाओं की फ़ौज खड़ी हो रही है और उनको रोजगार देने का माध्यम सिर्फ प्राइवेट कंपनियां हैं. कोई भी देश सभी बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी नहीं दे सकता, लेकिन भारत की राजनीतिक पार्टियाँ चाहती हैं कि भारत सरकार सभी बेरोजगार युवाओं को रोजगार दे जो असंभव है, हमारे देश के 60 फीसदी युवा खुद ही अपना रोजगार ढूंढते हैं या स्वरोजगार करते हैं, करीब 10 फ़ीसदी लोगों को सरकारी नौकरी मिल पाती है बाकी के लोग या तो मेहनत मजदूरी करते हैं या चाय-समोसा-पकौड़ा बेचकर अपने घर का खर्च चलाते हैं.

हमारे देश की सरकार ने स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं जैसे – मुद्रा योजना, स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया और अन्य. सरकार की कोशिश है कि हमारे देश के युवा बैंकों से लोन लेकर खुद ही अपना स्वरोजगार पैदा करें और अन्य बेरोजगार युवाओं को रोजगार दें.

विरोधी पार्टियाँ चाहती हैं कि हमारे देश के युवा बेरोजगार ही रहें ताकि उन्हें 2019 के चुनावों में एक बड़ा मुद्दा मिल सके लेकिन उनका सपना टूट रहा है क्योंकि सरकारी स्वरोजगार योजनाओं का हमारे देश के युवा फायदा उठा रहे हैं, देश के युवाओं ने करीब 7 लाख करोड़ रुपये बैंकों से कर्ज लेकर अपना खुद का स्वरोजगार शुरू किया है, ये लोग आने वाले दो तीन वर्षों में करोड़ों युवाओं को रोजगार देंगे, विरोधी पार्टियाँ भी इस बात को समझ रही हैं.

विरोधी पार्टियों को ये पच नहीं रहा है इसलिए उद्योगपतियों का मनोबल तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है ताकि लोग स्वरोजगार की तरफ सोचे ही नहीं, सभी उद्योगपतियों को चोर लुटेरा बताने की कोशिश की जा रही है ताकि सभी लोग भारत में अपना काम धंधा बंद करके भाग जाएं, ऐसा ऐसा हुआ तो करोड़ों लोग बेरोजगार हो जाएँगे और विरोधी दल यही चाहते हैं, चाय-समोसा और पकौड़ा बेचने वालों की हंसी उड़ाई जा रही है ताकि वे यह सब काम छोड़कर घर बैठ जाएं और बेरोजगार लोगों की फ़ौज खड़ी हो जाए.

जब कांग्रेस पॉवर में थी तो सभी उद्योगपति उसे अच्छे लगते थे, उस समय उसनें किसी भी उद्योगपति को चोर-लुटेरा नहीं बताया लेकिन आज उनके नेता देश के उद्योगपतियों को चोर लुटेरा बताकर अपमानित कर रहे हैं, उनका मनोबल तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, यह सिर्फ डर्टी पॉलिटिक्स है.