‘शहीद पॉलिटिक्स’ खेलकर केजरीवाल ने दिखाई जबरदस्त चालाकी

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नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल लोमड़ी जैसे चालाक नेता हैं. अब उन्होंने शहीद पॉलिटिक्स खेलकर देशभर के लोगों का ध्यान खींचा है साथ ही आर्मी-पुलिस वोटबैंक पर निशाना साधा है. केजरीवाल ने दिल्ली में पैदा हुए आर्मी और दिल्ली पुलिस के जवानों के शहीद होने पर उनके परिजनों को 1 करोड़ रुपये की सहायता राशि देने का वादा किया है. यह नियम जल, थल और वायु सेना में काम करने वाले सैनिकों पर लागू होगा लेकिन अभी इस योजना को असली जामा नहीं पहनाया गया है.

केजरीवाल ने ऐसी घोषणा करके बहुत बड़ी चालाकी दिखाई है. आपने पढ़ा होगा कि सर्जिकल स्ट्राइक के बाद केजरीवाल ने इंडियन आर्मी से सबूत मांगकर हमारे देश को पूरी दुनिया में अपमानित किया था. उस समय केजरीवाल पाकिस्तान के हीरो बन गए थे, पूरे पाकिस्तान में पोस्टर लगाकर उन्हें धन्यवाद दिया गया था, उस समय केजरीवाल की बहुत आलोचना हुई थी और फैजी भी उनके नाराज हो गए थे लेकिन कल शहीदों के लिए 1 करोड़ की घोषणा करके केजरीवाल ने फौजियों को अपनी तरफ खींचने की कोशिश की है.

केजरीवाल ने एक और पॉलिटिक्स खेल दी है. उन्होंने केंद्र सरकार से भी आग्रह किया है कि सभी राज्यों में शहीद होने वाले सैनिकों के लिए 1 करोड़ की सहायता राशि की घोषणा की जाय. ऐसा करके केजरीवाल ने पूरे देश में अपना वोटबैंक बढाने की कोशिश की है. जाहिर है कि जब दूसरे राज्यों के फौजी दिल्ली में 1 करोड़ रुपये की सहायता राशि मिलते देखेंगे तो उनकी नजर में केजरीवाल की छवि अच्छी होगी.

यहाँ पर यह भी सोचने लायक है कि दिल्ली में पैदा हुए कितने सैनिक भारतीय सेना में काम करते हैं. कुल मिलाकर ना के बराबर. भारतीय सेना में अधकतर लोग गाँव देहात से आये हुए होते हैं क्योंकि गाँव देहात में उन्हें परिश्रम करने, दौड़ने-भागने की बढ़िया सुविधा होती है. दिल्ली महानगर है. यहाँ के बच्चे ना तो फ़ौज में जाने के सपने देखते हैं और ना ही तैयारी करते हैं. हाँ कुछ लोग अफसर रैंक में जरूर भर्ती होते हैं लेकिन इनमें से बहुत कम शहीद होते हैं. पिछले चार वर्षों में दिल्ली का कोई भी सैनिक सेना में शहीद नहीं हुआ. केजरीवाल भी इस बात को भली भाति समझते हैं. उन्हें पता है कि साल में एक दो फौजी ही दिल्ली के शहीद होंगे इसलिए 1-2 करोड़ ही जाएंगे लेकिन दूसरे राज्यों के सैकड़ों फौजी शहीद होते हैं इसलिए वह 1-1 करोड़ की सहायता राशि नहीं दे पायेंगे. केजरीवाल को पैसा भी नहीं देना पड़ेगा लेकिन उनकी छवि पूरे देश में अच्छी हो जाएगी क्योंकि लोग सोचेंगे ‘केजरीवाल तो शहीदों को 1-1 करोड़ की सहायता राशि देता है, दूसरे राज्य नहीं देते, केजरीवाल बहुत अच्छा मुख्यमंत्री है.

इसी तरह से दिल्ली पुलिस में भी साल में एक दो पुलिस वाले ही शहीद होते हैं. जबकि दूसरे राज्यों में सैकड़ों लोग शहीद होते हैं. केजरीवाल ने सेना और पुलिस को अपना बनाने की लोमड़ी जैसी चालाक पॉलिटिक्स खेली है. अब देखते हैं कि इसमें उन्हें सफलता मिल पाती है या नहीं.