गाय को बूचड़खानों में काटने का देते हो लाइसेंस, काला हिरण मारने पर 5 साल की सजा: वीरेश शांडिल्य

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Viresh Shandilya

फरीदाबाद: एंटी टेरोरिस्ट फ्रंट इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेश शांडिल्य ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश को पत्र भेजकर कहा कि जोधपुर के न्यायिक मैजिस्ट्रेट ने काला हिरण शिकार मामले में सलमान खान को 5 साल की सजा व 10 हजार जुर्माना कर न्यायपालिका की विश्वसनीयता को गहरा धक्का पहुंचाया है। शांडिल्य ने कहा दुःख की बात है जिस देश में बूचड़खानों में गौमाता को काटने का लाइसेंस सरकार खुद देती है वहा हिरण मारने पर 5 साल सजा दी जाती है l उन्होंने सवाल भी किया क्या काला हिरण मारना देशद्रोह है उन्होंने कहा कि देश में नक्सलवादी आये दिन सीआरपीएफ के जवानों व अधिकारियों को मौत के घाट उतार रहे है व जम्मू कशमीर में आतंकवादी सेना के सिर काट रहे है सेना पर पत्थराव कर रहे है उन्हें मुख्यधारा में लाकर माफ कर दिया जाता है और एक पशु को मारने पर 5 साल की सजा कर क्या न्यायपालिका ने अपनी छवि को कमजोर नही किया है।

एंटी टेरोरिस्ट फ्रंट इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेश शांडिल्य ने कहा कि इस देश में खुलेआम गौमाता को काटा जाता है जो 100 करोड़ हिन्दुओं की आस्था का प्रतीक है, बकरे, मुर्गे काटकर जानवरों से क्रूरता की जाती है। क्या सुप्रीम कोर्ट ने इस क्रूरता पर कोई स्वत: संज्ञान लिया. शांडिल्य ने सुप्रीम कोर्ट को लिखे पत्र में कहा कि ऐसा लगता है कि मैजिस्ट्रेट ने जस्टिस देने की बजाय या ऐतिहासिक जजमैंट लिखने की बजाय अपना नाम चमकाने की पहल की है।

उन्होेंने कहा कि जातिसूचक शब्द पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला दिया, दहेज मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला दिया. यह फैसले जनता के लिए मील का पत्थर है। सलमान खान को एक हिरण जो जानवर है उसको मारने पर 5 साल की सजा कर दी इस पर न्यायपालिका को गंभीर चिंतन करना होगा.

उन्होंने कहा कि देश में आए दिन दुर्घटनाएं होती है रोड़. एक्सीडैन्ट होते है. परिवार के परिवार खत्म हो जाते है. आज तक ऐसे मामलों में दुर्घटना के दोषी को 6 महीने की सजा तो क्या मिलनी उसकी तुरंत जमानत ले ली जाती है ।

शांडिल्य ने कहा हाईलाइटेड और सैलिब्रिटियों को ऐसे जेल भेजना व अन्य जरूरी केसों पर फैंसले देना न्यायपालिका की गरिमा से खिलवाड़ है। शांडिल्य ने सवाल किया की दो दिन सलमान को जेल में रखकर न्यायपालिका ने क्या संदेश दिया. यह संदेश जरूर गया कि इस देश में इंसान से ज्यादा कीमत जानवर की है. यही नही शांडिल्य ने मुख्य न्यायधीश को लिखे पत्र में यह मांग की कि वैष्णों देवी पर दिन में 50 चक्कर लोगों को घोड़ों पर बिठकार लगवाएं जाते है। यही नही खुलेआम बाजारों में बकरा कटा हुआ दुकानों में लटकाया जाता है। कई गुणा बोझ घोड़े रेहड़े पर रखकर जानवरों से अत्याचार हो रहा है क्या सुप्रीम कोर्ट इस बात पर संज्ञान लेगा और गाय, बकरें काटने वालों व जानवरों के साथ क्रूरता करने वालों पर कोई दिशा निर्देश जारी होंगे.