बड़ा सवाल, अगर लड़की नाबालिक थी तो विधायक के पास कैसे पहुँच गयी सरकारी नौकरी मांगने

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उन्नाव: उन्नाव मामले में कुछ ना कुछ गड़बड़ी लग रही है, लड़की के बारे में कहा जा रहा है कि जब उसका गैंगरेप हुआ तो वह नाबालिक थी, पिछले साल 4 जून 2017 की रात गैंगरेप की बात सामने आ रही है, जब रेप का मामला दर्ज कराया गया तो उसमें विधायक का नाम नहीं था. दूसरी बार मामल दर्ज करवाया तो उसमें विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का भी नाम डाल दिया.

लड़की के परिजन एक तरफ तो उसे नाबालिक बता रहे हैं और दूसरी तरफ यह भी कह रहे हैं कि उसको विधायक ने नौकरी देने का झांसा देकर अपनी पास बुलाया था, शशि सिंह नाम की एक महिला उसे नौकरी दिलवाने का लालच देकर विधायक के पास ले गयी थी, अब सवाल यह है कि नाबालिक को ना तो प्राइवेट नौकरी मिलती है और ना ही सरकारी नौकरी मिलती है, यह बात लड़की के माँ-बाप भी जानते रहे होंगे उसके बाद भी विधायक के पास नौकरी मांगने के लिए कैसे भेज दिया.

जानकारी के अनुसार रेप की यह वारदात पिछले साल 4 जून 2017 की है. उस वक्त मीडिया ने इसे तूल नहीं दिया. पीडिता ने इसका मामला दर्ज करवाया और 22 जून 2017 को धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया जिसमें बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर का नाम नहीं लिया और ना ही FIR में उनका नाम लिखवाया. उस समय गैंगरेप का आरोप दो लड़कों पर था.

उसके बाद 12 फ़रवरी 2018 को पीडिता की माँ ने SGM कोर्ट में फिर से धारा 156/3 के तहत मामला दर्ज करवाया और उसमें विधायक का नाम भी लिखवा दिया.

यह भी बात पता चली है कि लड़की को नौकरी दिलाने का झांसा देकर शशि सिंह नाम की एक महिला उन्हें कहीं ले गयी थी जहाँ पर उसके साथ रेप या गैंगरेप किया गया.

एक हैरानी वाली बात ये है कि एक तरफ तो लड़की को नाबालिक बताया जा रहा है और दूसरी तरफ वह नौकरी के लिए गयी थी जबकि नाबालिक को सरकार नौकरी दे ही नहीं सकती. इस मामले में जरूर कुछ ना कुछ गड़बड़ है.