नवजोत सिंह सिद्धू को पंजाब सरकार ने ही साबित किया गुरुनाम का हत्यारा, मांगी 3 साल सजा

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नई दिल्ली: पंजाब सरकार के मंत्री और कांग्रेसी नेता नवजोत सिंह सिद्धू आज हत्यारे साबित हो गए और उन्हें पंजाब सरकार ने ही हत्यारा साबित कर दिया. यही नहीं पंजाब सरकार ने सिद्धू को हाई कोर्ट द्वारा मिली तीन साल की सजा को सही ठहराया. अब सिद्धू को तीन साल की सजा मिलनी तय है.

सिद्धू को एक युवक की हत्या में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने तीन साल की सजा सुनायी थी. पीड़ित पक्ष तीन साल की सजा से संतुष्ट नहीं था इसलिए सुप्रीम कोर्ट में सजा बढाने के लिए याचिका डाली थी. पहले नवजोत सिंह सिद्धू खुद को बेगुनाह बता रहे थे लेकिन आज पंजाब सरकार ने ही उन्हें दोषी साबित कर दिया और उनकी तीन साल की सजा को सही ठहरा दिया.

पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि सिद्धू को मिली तीन साल की सजा सही है, इस मामले में उन्हें जान बूझकर नहीं फंसाया गया. वह ह्त्या के आरोपी हैं और उन्हें सजा मिलनी ही चाहिए.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सिद्धू पर 27 दिसम्बर 1988 को गुरुनाम की ह्त्या का आरोप था, उन्होंने करीब 30 साल पहले रोड पर पंजाब के एक युवक गुरनाम सिंह की हत्या कर दी थी. इस मामले में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उन्हें तीन साल की सजा सुना रखी है. इस फैसले के खिलाफ नवजोत सिंह सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी है, कई दिनों से इस मामले पर सुनवाई हो रही है.

नवजोत सिंह सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट में बयान दिया था कि मैं मामले में निर्दोष हूँ. सिद्धू की तरफ से वरिष्ठ वकील RC Cheema कोर्ट में बहस कर रहे हैं. इस केस की सुनवाई न्यायाधीश जे चेलामेश्वर और के कौल की बेंच कर रही है. .

क्या है पूरी घटना 

रिपोर्ट के अनुसार 27 दिसम्बर 1988 को सिद्धू अपनी पत्नी रुपिंदर संधू के साथ कहीं जा रहे थे. सिद्धू और उनकी पत्नी एक जिप्सी में बैठे थे, पटियाला के गुरुनाम सिंह कार से जा रहे थे लेकिन सिद्धू उन्हें साइड नहीं दे रहे थे, जब गुरनाम सिंह ने उन्हें साइड देने को कहा तो सिद्धू उसे रोककर अपनी जिप्सी से उतर गए और उसे पीटने लगे, उन्होने गुरनाम को जमकर पीटा और उसे काफी दूर तक घसीटा, गुरनाम सिंह को चक्कर आ गया और बेहोश होकर वहीँ गिर गया.

इसके बाद सिद्धू और उनकी पत्नी संधू वहां से भाग गए, इसके बाद सिद्धू ने एक और शर्मनाक और इंसानियत की हत्या करने वाला काम किया. वह अपने साथ गुरनाम की कार की चाबी भी उठा ले गए ताकि गुरनाम के जिन्दा बचने के सभी रास्ते बंद हो जाएं. जब गुरनाम सिंह को अस्पताल लाया गया तो उसकी मौत हो गयी थी.

इस घटना के बाद सिद्धू और उनकी पत्नी पर मर्डर का मामला दर्ज किया गया लेकिन Patiala Session जज ने उन्हें 1999 में बरी कर दिया. उसके बाद मृतक गुरनाम सिंह के पिता ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में फ़रियाद की जहाँ पर सिद्धू को तीन साल की सजा सुनायी गयी. अब सिद्धू ने खुद ही सुप्रीम कोर्ट में इस सजा को पलटने की अपील की है लेकिन उनके बचने के आसार कम ही हैं. आखिर गलत काम की सजा तो भुगतनी ही पड़ेगी.