हत्या में आम आदमी को मिलती है 14 साल या फांसी, कांग्रेसी सिद्धू को सिर्फ 3 साल की सजा, क्यों

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नई दिल्ली: यह खबर पढ़कर आप भी सोच में पड़ जाएंगे. जब आम आदमी कोई हत्या में दोषी पाया जाता है तो उसके आजीवन कारावास या फांसी की सजा मिलती है लेकिन नवजोत सिंह सिद्धू ने एक युवक की हत्या की और उन्हें हाईकोर्ट ने दोषी भी साबित किया लेकिन उन्हें सिर्फ तीन साल की सजा सुनायी गयी, तीन साल की सजा में जमानत मिलने का प्रावधान है.

अब सवाल यह उठता है कि क्या नवजोत सिंह सिद्धू के लिए कानून अलग है, ये कहाँ का कानून है कि उन्हें हत्या में सिर्फ तीन साल की सजा सुनायी गयी है. पीड़ित पक्ष उन्हें आजीवन कारावास की सजा चाहता है लेकिन पंजाब सरकार सिद्धू के लिए सिर्फ तीन साल की सजा की मांग कर रही है. यह अपने आप में हैरान करने वाला है.

पंजाब की कांग्रेस सरकार ने ही अपने मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू को हत्यारा बता दिया है और उन्हें दी गयी तीन साल की सजा को उचित बताया है. पंजाब सरकार ने ऐसा इसलिए किया है ताकि सिद्धू को आजीवन कारावास की सजा से बचाया जा सके.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कल पंजाब की कांग्रेस सरकार ने अपने ही पर्यटन मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू को सजा दिए जाने के हाईकोर्ट के फैसले का समर्थन किया. सिद्धू को हाई कोर्ट ने गुरुनाम की हत्या में तीन साल की सजा सुना रखी है.

नवजोत सिंह सिद्धू को रोड रेज के मामले में गैर-इरादतन हत्या के जुर्म में दोषी ठहराते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने तीन साल की सजा एवं 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी थी. हाईकोर्ट ने इस मामले में सह-अभियुक्त रुपिंदर सिंह संधू को बरी करने के निचली अदालत का फैसला पलट दिया था. सिद्धू ने 20 साल पहले गुरुनाम की ह्त्या की थी और हाईकोर्ट ने उन्हें दोषी साबित किया है.

इस पर नवजोत सिंह सिद्धू ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, पिछले कुछ दिनों से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है, पीड़ित पक्ष नवजोत सिंह सिद्धू की सजा बढाने की मांग कर रहा है क्योंकि आज तक हत्या के किसी भी मामले में सिर्फ तीन साल की सजा नहीं हुई है, हत्या में कम से कम 14 साल या फांसी की सजा होनी चाहिए लेकिन सिद्धू ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में कोई ना कोई जुगाड़ करके सिर्फ तीन साल की सजा करवाई थी जिसमें वह जमानत भी ले सकते हैं, लेकिन अब सिद्धू का खेल खराब होता दिख रहा है.