कांग्रेसी नेता नवजोत सिंह सिद्धू ने गुरनाम सिंह को पीट-कर मार डाला था, पढ़ें कब, कैसे और कहाँ

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नई दिल्ली, 22 मार्च: बहुत कम लोग जानते हैं कि कांग्रेस के नेता और पंजाब की कांग्रेस सरकार में मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने पटियाला के एक युवक गुरनाम सिंह की पीट पीट कर हत्या कर चुके हैं और इस मामले में उन्हें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने तीन साल की सजा दी है.

आज से करीब 30 साल पहले सिद्धू ने रोड पर पंजाब के एक युवक गुरनाम सिंह की हत्या कर दी थी. इस मामले में पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उन्हें तीन साल की सजा सुना रखी है. इस फैसले के खिलाफ नवजोत सिंह सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी है, कल से इस मामले पर सुनवाई हो रही है.

आज नवजोत सिंह सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट में बयान दिया. उन्होंने कहा कि मैं इस मामले में निर्दोष हूँ. सिद्धू की तरफ से वरिष्ठ वकील RC Cheema कोर्ट में बहस कर रहे हैं. इस केस की सुनवाई न्यायाधीश जे चेलामेश्वर और के कौल की बेंच कर रही है. अब देखना है कि सिद्धू खुद को बचा पाते हैं या जेल जाते हैं. ऐसे कम ही मामले होते हैं जिसमें सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट का फैसला पलटता है. अगर सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की सजा बरकरार रखी तो सिद्धू को तुरंत ही जेल भेज दिया जाएगा.

क्या है पूरी घटना 

रिपोर्ट के अनुसार 27 दिसम्बर 1988 को सिद्धू अपनी पत्नी रुपिंदर संधू के साथ कहीं जा रहे थे. सिद्धू और उनकी पत्नी एक जिप्सी में बैठे थे, पटियाला के गुरुनाम सिंह कार से जा रहे थे लेकिन सिद्धू उन्हें साइड नहीं दे रहे थे, जब गुरनाम सिंह ने उन्हें साइड देने को कहा तो सिद्धू उसे रोककर अपनी जिप्सी से उतर गए और उसे पीटने लगे, उन्होने गुरनाम को जमकर पीटा और उसे काफी दूर तक घसीटा, गुरनाम सिंह को चक्कर आ गया और बेहोश होकर वहीँ गिर गया.

इसके बाद सिद्धू और उनकी पत्नी संधू वहां से भाग गए, इसके बाद सिद्धू ने एक और शर्मनाक और इंसानियत की हत्या करने वाला काम किया. वह अपने साथ गुरनाम की कार की चाबी भी उठा ले गए ताकि गुरनाम के जिन्दा बचने के सभी रास्ते बंद हो जाएं. जब गुरनाम सिंह को अस्पताल लाया गया तो उसकी मौत हो गयी थी.

इस घटना के बाद सिद्धू और उनकी पत्नी पर मर्डर का मामला दर्ज किया गया लेकिन Patiala Session जज ने उन्हें 1999 में बरी कर दिया. उसके बाद मृतक गुरनाम सिंह के पिता ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में फ़रियाद की जहाँ पर सिद्धू को तीन साल की सजा सुनायी गयी. अब सिद्धू ने खुद ही सुप्रीम कोर्ट में इस सजा को पलटने की अपील की है लेकिन उनके बचने के आसार कम ही हैं. आखिर गलत काम की सजा तो भुगतनी ही पड़ेगी.